नई दिल्ली, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हाल में जारी कंटेंट हटाने के आदेशों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। क्लब ने कहा कि सरकार की आलोचना करने वाले कंटेंट को निशाना बनाते हुए इस तरह की कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
PCI ने अपने बयान में कहा कि कंटेंट क्रिएटर्स को ब्लॉक करना या उनकी सामग्री हटाना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का हनन है।
क्लब ने सुप्रीम कोर्ट के श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अस्पष्ट प्रावधानों के आधार पर ऑनलाइन सेंसरशिप असंवैधानिक है और इससे भय का माहौल बनता है।
बयान के मुताबिक, हाल के दिनों में फेसबुक और एक्स (पूर्व में ट्विटर) को कई नए टेकडाउन आदेश जारी किए गए हैं।
इनमें फैक्ट-चेकर मोहम्मद जुबैर, और मीडिया प्लेटफॉर्म मोलिटिक्स व नेशनल दस्तक को निशाना बनाया गया। इससे पहले मार्च में 4PM न्यूज का यूट्यूब अकाउंट भी ब्लॉक किया गया था।
हाल ही में मोलिटिक्स, नेशनल दस्तक और व्यंग्यकार राजीव निगम के फेसबुक पेज भी आईटी एक्ट के तहत हटाने के आदेशों के बाद ब्लॉक कर दिए गए।
PCI के अनुसार, जुबैर को एक्स पर सूचना दी गई कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सेक्शन 69A के तहत उनके कई पोस्ट देशभर में ब्लॉक किए गए हैं, हालांकि संबंधित कंटेंट का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया। क्लब ने इसे आलोचनात्मक आवाजों के खिलाफ चल रही कार्रवाई का हिस्सा बताया।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की प्रबंध समिति ने इन कार्रवाइयों को कार्यपालिका का खुला अतिक्रमण बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
समिति ने मांग की कि अधिकारी पत्रकारों और नागरिकों के अभिव्यक्ति के अधिकार का सम्मान करें। साथ ही, टेकडाउन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को मनमाना और असंवैधानिक करार दिया।
