इंदौर, 1 अप्रैल। मध्य प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बीच अंतर को लेकर मामला अब अदालत तक पहुंच गया है। इंदौर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है कि जब लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं को ₹1500 प्रतिमाह दिए जा रहे हैं, तो दिव्यांगजनों को केवल ₹600 पेंशन क्यों दी जा रही है।

याचिका में कहा गया है कि दिव्यांगजन समाज का अधिक संवेदनशील वर्ग हैं और उन्हें अधिक आर्थिक सहायता की आवश्यकता होती है। ऐसे में कम पेंशन देना समानता के सिद्धांत के विपरीत माना जा रहा है। याचिकाकर्ता ने यह भी दलील दी कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत राज्य का दायित्व है कि वह दिव्यांगों को बेहतर सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इस अंतर को किस आधार पर उचित ठहराती है और क्या दिव्यांग पेंशन में बढ़ोतरी की दिशा में कोई कदम उठाया जाएगा।