राज्य सूचना आयोग ने मांगा पूरा रिकॉर्ड
इंदौर, 12 मई। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हुए हादसे के बाद नगर निगम के जलप्रदाय विभाग में पिछले वर्षों के करोड़ों रुपये के खर्चों की जांच तेज हो गई है। मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए नगर निगम के जलप्रदाय विभाग को वर्ष 2018 से 2022 तक विभिन्न बजट मदों में किए गए भुगतान, स्वीकृत कार्यों और खर्चों से जुड़ा संपूर्ण रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
यह आदेश पूर्व पार्षद दिलीप कौशल द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी के संदर्भ में जारी किया गया है। कौशल ने नगर निगम इंदौर के जल वितरण, पाइपलाइन रखरखाव और संबंधित कार्यों पर हुए करोड़ों रुपये के खर्च का ब्यौरा मांगा था। लोक सूचना अधिकारी द्वारा जानकारी उपलब्ध नहीं कराए जाने के बाद प्रथम अपीलीय अधिकारी ने दस्तावेज देने के निर्देश दिए, लेकिन आदेश के बावजूद जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद मामला राज्य सूचना आयोग पहुंचा।
आयोग ने अब नगर निगम जलप्रदाय विभाग को निर्देशित किया है कि वह 1 अप्रैल 2018 से 30 सितंबर 2022 तक विभिन्न बजट मदों के अंतर्गत किए गए भुगतान, स्वीकृत फाइलों, कार्यों और संबंधित दस्तावेजों का अवलोकन कराए तथा चयनित जानकारी उपलब्ध कराते हुए 29 मई 2026 तक पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करे।
मामले में सामने आया है कि विभागीय अधिकारियों द्वारा 792 फाइलों के माध्यम से करोड़ों रुपये खर्च होना बताया गया है। इनमें जल वितरण, पाइपलाइन रखरखाव, पुरानी पाइपलाइन बदलने और जल वितरण लाइनों के रखरखाव जैसे कार्य शामिल हैं।
प्रमुख बजट मदों में स्वीकृत राशि:
- बजट मद 2303008 (जल वितरण हेतु स्टोर): 4.06 करोड़ रुपये
- बजट मद 2305016 (शहर की जल वितरण लाइनों का रखरखाव): 29.40 करोड़ रुपये
- बजट मद 2305020 (पुरानी पाइप लाइन बदलना): 33.93 करोड़ रुपये
- बजट मद 2305045 (जल वितरण लाइन रखरखाव): 10.27 करोड़ रुपये
इन सभी मदों को मिलाकर कुल 77.66 करोड़ रुपये के खर्च का प्रावधान सामने आया है।
इतनी बड़ी राशि स्वीकृत और खर्च होने के बावजूद शहर की जल वितरण व्यवस्था, पाइपलाइन प्रबंधन और रखरखाव की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। भागीरथपुरा हादसे के बाद यह मामला और संवेदनशील हो गया है। सामाजिक संगठनों और नागरिकों का कहना है कि यदि पाइपलाइन रखरखाव और पुरानी लाइनों को बदलने का कार्य प्रभावी ढंग से किया गया होता तो कई गंभीर समस्याओं और संभावित हादसों से बचा जा सकता था।
राज्य सूचना आयोग के इस आदेश को पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब निगाहें नगर निगम जलप्रदाय विभाग पर टिकी हैं कि वह आयोग के आदेशानुसार रिकॉर्ड प्रस्तुत करता है या नहीं। रिकॉर्ड सार्वजनिक होने के बाद करोड़ों रुपये के खर्च और जमीनी कार्यों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
