इंदौर, 22 मई High Court of Madhya Pradesh की इंदौर खंडपीठ ने लोकायुक्त पुलिस द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के एक मामले में दोषसिद्ध निरीक्षक मधुसूदन पाठक को बड़ी राहत देते हुए उसकी शेष जेल सजा निलंबित कर जमानत दे दी है। ट्रायल कोर्ट द्वारा 26 फरवरी 2026 को सजा सुनाए जाने के लगभग ढाई महीने के भीतर आरोपी को उच्च न्यायालय से राहत मिली। यह आदेश न्यायमूर्ति Gajendra Singh ने पारित किया।
प्रकरण के अनुसार मधुसूदन पाठक वर्ष 2016 में केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो, मंदसौर में सब इंस्पेक्टर के पद पर पदस्थ था। लोकायुक्त पुलिस के मुताबिक उसने शिकायतकर्ता के पिता को मध्यप्रदेश राज्य की नारकोटिक्स पुलिस के एक मामले में आरोपी नहीं बनाने के एवज में पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी तथा 30 हजार रुपये स्वीकार किए थे। इसी मामले में विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), मंदसौर ने आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 8 एवं 13(1)(घ)/13(2) के तहत दोषी ठहराते हुए पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से अधिवक्ता राघवेंद्र सिंह रघुवंशी ने हाईकोर्ट के समक्ष पक्ष रखते हुए तर्क दिया कि शिकायतकर्ता मुकेश बैरागी के पिता कमलदास बैरागी केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के मुखबिर थे और उनसे संबंधित गुप्त निधि के लगभग पांच लाख रुपये वापस मांगे जाने के कारण आरोपी अधिकारी को झूठे भ्रष्टाचार प्रकरण में फंसाया गया। बचाव पक्ष के अनुसार शिकायत व्यक्तिगत दुर्भावना और प्रतिशोध की भावना से प्रेरित थी।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि कथित घटना अगस्त 2016 की है, जबकि आरोपी को वर्ष 2018 में संशोधित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के आधार पर दोषसिद्ध किया गया। अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि ट्रायल कोर्ट ने अंतिम बहस के चरण में वर्ष 2025 में नए आरोप निर्धारित किए, जो केवल तकनीकी संशोधन नहीं बल्कि पूर्णतः नए आरोप थे।
बचाव पक्ष ने यह तर्क भी रखा कि वर्ष 2016 की घटना होने के कारण वर्ष 2018 में संशोधित धाराओं के तहत न तो आरोप निर्धारित किए जा सकते थे और न ही संशोधित प्रावधानों के आधार पर विचारण चलाया जा सकता था। साथ ही बचाव पक्ष को गवाहों की प्रभावी पुनः जिरह का अवसर भी नहीं दिया गया, जबकि अभियोजन पक्ष के आवेदन स्वीकार किए गए।
वहीं लोकायुक्त पुलिस ने जमानत आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी रंगे हाथों पकड़ा गया था और अभियोजन पक्ष के गवाहों ने प्रकरण का समर्थन किया है। अभियोजन ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 20 के तहत वैधानिक उपधारणा आरोपी के विरुद्ध लागू होती है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपील को सुनवाई योग्य मानते हुए स्वीकार कर लिया तथा आरोपी की शेष जेल सजा निलंबित कर जमानत मंजूर कर दी।
