नई दिल्ली/इंदौर, 31 मार्च। नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ 1 अप्रैल से देशभर में टैक्स, बैंकिंग, पैन कार्ड, रेलवे टिकट और अन्य वित्तीय नियमों में कई अहम बदलाव लागू होने जा रहे हैं। इनका सीधा असर आम लोगों की जेब और दैनिक खर्चों पर पड़ेगा।
आधिकारिक और प्रस्तावित बदलावों के आधार पर प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं-
नए वित्तीय वर्ष से आयकर प्रणाली में कुछ प्रक्रियात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं, हालांकि टैक्स स्लैब में फिलहाल कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। वहीं, किराए पर रहने वाले कर्मचारियों के लिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA) छूट के दायरे का विस्तार किया जा सकता है, जिससे अधिक शहरों के लोगों को राहत मिलेगी।
श्रम कानूनों के लागू होने की स्थिति में वेतन संरचना में बदलाव संभव है। इसके तहत बेसिक सैलरी का हिस्सा बढ़ने से कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) में योगदान बढ़ेगा, जबकि हाथ में मिलने वाली सैलरी कम हो सकती है।
बैंकिंग क्षेत्र में भी बदलाव प्रस्तावित हैं। तय सीमा से अधिक एटीएम ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। कुछ बैंकों ने फ्री ट्रांजैक्शन की सीमा घटाने और नकद निकासी सीमा में संशोधन के संकेत दिए हैं।
बीमा और पैन कार्ड से जुड़े नियमों में भी बदलाव संभावित हैं। अब कम राशि के बीमा प्रीमियम पर भी पैन नंबर देना अनिवार्य किया जा सकता है। वहीं, पैन कार्ड आवेदन प्रक्रिया में अतिरिक्त दस्तावेजों की आवश्यकता और आधार आधारित इंस्टेंट ई-पैन सुविधा में बदलाव की संभावना जताई गई है।
संपत्ति और बड़े लेनदेन से जुड़े नियमों में भी संशोधन प्रस्तावित हैं। 20 लाख रुपये से कम मूल्य की संपत्ति के लेनदेन में पैन की अनिवार्यता हटाने पर विचार किया जा रहा है। होटल और रेस्तरां में उच्च मूल्य के भुगतान पर पैन की सीमा बढ़ाने का भी प्रस्ताव है।
वाहन खरीद, बैंक खाते में बड़े लेनदेन और अन्य वित्तीय गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई जा सकती है, जिसके तहत निर्धारित सीमा से अधिक राशि पर पैन विवरण देना अनिवार्य होगा।
टोल भुगतान से जुड़े फास्टैग के वार्षिक शुल्क में वृद्धि की संभावना है, जिससे यात्रियों का खर्च बढ़ सकता है। वहीं, रेलवे टिकट रिफंड नियमों को सख्त किया गया है। नए नियमों के तहत निर्धारित समय सीमा के भीतर टिकट रद्द नहीं करने पर रिफंड नहीं मिलेगा।
इसके अलावा, केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती का निर्णय लिया है, जिससे उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिल सकती है, हालांकि इससे सरकारी राजस्व पर दबाव पड़ने की आशंका जताई गई है।
कुल मिलाकर, 1 अप्रैल से लागू या प्रस्तावित ये बदलाव टैक्स, बैंकिंग, निवेश और यात्रा से जुड़े खर्चों को प्रभावित करेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में इन नियमों की जानकारी रखना जरूरी है, ताकि वित्तीय योजना बेहतर ढंग से बनाई जा सके।
