6 अप्रैल से शुरू हुई नियमित सुनवाई, 2 घंटे चली मैराथन सुनवाई
इंदौर, 06 अप्रैल 2026: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई हुई। मुख्य याचिकाकर्ता हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन पेश हुए। दोपहर ढाई बजे से हुई सुनवाई 2 घंटे तक चली जिसमें अधिवक्ता जैन ने युगल पीठ जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी को भोजशाला के इतिहास से अवगत कराया ।
अधिवक्ता जैन ने भोजशाला मोन्युमेंट के बारे में बताया । अदालत ने पूछा कि भोजशाला मुस्लिम मॉन्यूमेंट क्यों नहीं हो सकती ? जिस पर अधिवक्ता जैन ने कहा कि वे मुस्लिम धर्म के एक्सपर्ट नहीं है लेकिन किसी भी मस्जिद में देवी (DEITY) नहीं हो सकती। उन्होने तर्क दिया कि भोजशाला का स्ट्रक्चर हिन्दू मंदिर का है। वहाँ सरस्वती सदन था। हवन कुंड और मंडप के चिन्ह वहाँ मिलते हैं।
अदालत ने अधिवक्ता जैन से पूछा उनके द्वारा प्रस्तुत इतिहास का सोर्स क्या है जिस पर जैन ने अदालत को बताया कि कई पुस्तकें हैं जिनका रिफरेंस याचिका में दिया गया है। अधिवक्ता जैन ने कोर्ट को बताया कि भोजशाला परमार राजवंश द्वारा बनाया गया था , जिसे अलाउद्दीन खिलजी द्वारा तोड़ा गया। वहाँ आज भी संस्कृत व्याकरण के बारे में जानकारी मिलती है। एएसआई की रिपोर्ट में भी बताया गया है।
हिन्दू पक्ष की ओर से एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड सुप्रीम कोर्ट पार्थ यादव ने बताया कि आज एक फाउंडेशनल बैकग्राउंड बताया है कि 1935 में क्या घटना हुई थी और 1935 तक कोई भी भोजशाला को लेकर मुसलमानों में कोई भी समस्या नहीं थी, लेकिन 1935 में कुछ चीजें हुई जिसके कारण से थोड़ा डिस्प्यूट हुआ, तो जो लीगल आर्गुमेंट्स हैं। उसे कोर्ट के सामने प्रस्तुत किया है।
जैन पक्ष ने मांगा दो हफ्ते का समय
दिल्ली से संलेक जैन द्वारा दायर याचिका में जैन पक्ष की ओर से पेश हुई अधिवक्ता प्रिया जैन ने बताया कि भोजशाला पर जैन पक्ष भी अपना दावा पेश कर रहा है, जिसके पक्ष में ठोस आधार और साक्ष्य हैं। वाग्य देवी की प्रतिमा का उल्लेख जैन शास्त्रों में मिलता है। हमने आज अदालत से दो हफ्ते का समय मांगा है।
फिलहाल, मामले में सुनवाई जारी है और अदालत के अगले कदम पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं।
