छिंदवाड़ा के परासिया में जहरीले कफ सिरप से 11 बच्चों की मौत, डॉक्टर और दवा कंपनी पर एफआईआर

इंदौर/छिंदवाड़ा, न्यूज़O2। छिंदवाड़ा जिले के परासिया में जहरीला कफ सिरप ColdRif पीने से 11 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद परासिया पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी और दवा निर्माता कंपनी श्रीसन फार्मास्यूटिकल मैन्यूफैक्चर (पता– NO 787, बैंगलोर हाइवे, सांगूवरचतरम मथुरा, कांचीपुरम, तमिलनाडु) के संचालकों समेत अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 105, 276 और 27(ए) के तहत मामला दर्ज किया है।

पुलिस के अनुसार, डॉ. प्रवीण सोनी ने बच्चों के इलाज के दौरान जिस ColdRif Syrup (Paracetamol, Phenylepherine Hydrochloride, Chlopheniramine Maleate Syrup) का पर्चा लिखा था, उसके बैच नंबर SR-13 में जहरीला मिलावटी पदार्थ डाई-इथीलीन ग्लाइकोल पाया गया। यह जहरीला रसायन बच्चों की किडनी फेल और अन्य जटिलताओं का कारण बना, जिससे उनकी मौत हो गई।

घटना के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। डॉक्टर पर आरोप है कि उन्होंने इलाज में गंभीर लापरवाही बरती । वहीं दवा कंपनी के खिलाफ बच्चों की मौत का जिम्मेदार मानते हुए पुलिस ने आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है।

धारा 105 (BNS) –  गैर-इरादतन हत्या

धारा 276 (BNS) – दवाओं में मिलावट
धारा 27(ए) (BNS) – अभिभावक/सहमति के नाम पर कृत्य के अपवाद का दुरुपयोग

बच्चों की मौत की श्रृंखला

पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त से अक्टूबर 2025 के बीच परासिया और आसपास के गांवों के दर्जनभर बच्चे सर्दी-जुकाम और बुखार की शिकायत लेकर डॉ. प्रवीण सोनी और अन्य डॉक्टरों को दिखाए गए। दवा सेवन के बाद बच्चों में पेशाब रुकना, क्रिएटिनिन-यूरिया बढ़ना और किडनी फेलियर जैसे लक्षण दिखे।

  • 24 अगस्त से 4 अक्टूबर 2025 तक कुल 11 बच्चों की मौत हो चुकी है।
  • इनमें शिवम राठौर (4 वर्ष), नमिता (3 वर्ष), अदनान, उसैद (4 वर्ष), रिषिका (5 वर्ष), हितांश सोनी (5 वर्ष), चंचलेश, विकास, संध्या, योगिता (2 वर्ष) समेत कई मासूम शामिल हैं।
  • रिपोर्ट में नागपुर मेडिकल कॉलेज की किडनी बायोप्सी में Acute Tubular Injury पाई गई।

जांच में क्या निकला?

  • तमिलनाडु ड्रग टेस्टिंग लैब की रिपोर्ट में ColdRif Syrup में Di-Ethylene Glycol (48.6% W/V) मिला।
  • भोपाल की सरकारी औषधि प्रयोगशाला ने भी सैंपल में 46.28% W/V Di-Ethylene Glycol की पुष्टि की।
  • यह रसायन स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक और किडनी फेलियर का कारण है।

यह घटना न केवल स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को उजागर करती है बल्कि मिलावटी दवाओं की निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।