छात्रों का भविष्य दांव पर, कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंची शिकायत
इंदौर, 2 जून 2026। धार रोड स्थित चोइथराम फाउंटेन हायर सेकेंडरी स्कूल पर 12वीं कक्षा के छात्रों को बीच सत्र में शैक्षणिक अनिश्चितता में छोड़ने के आरोप लगे हैं। मंगलवार को कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे छात्रों और अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन ने एमपी बोर्ड का डायस कोड सरेंडर कर दिया है और अब छात्रों पर सीबीएसई बोर्ड में जाने या अन्य स्कूलों में प्रवेश लेने का दबाव बनाया जा रहा है।
छात्रों ने बताया कि वे बचपन से इसी विद्यालय में मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (एमपी बोर्ड) के अंतर्गत अध्ययन कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने 11वीं कक्षा उत्तीर्ण कर 12वीं में प्रवेश लिया है, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने अचानक सूचित किया कि अब 12वीं की पढ़ाई उन्हें किसी अन्य विद्यालय से करनी होगी। छात्रों का कहना है कि 12वीं बोर्ड परीक्षा का पंजीयन प्रक्रिया 11वीं से ही शुरू हो जाती है, ऐसे में सत्र के बीच यह निर्णय उनके भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
शिकायत मिलने पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) श्रीमती शांता राम भार्गव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्कूल के प्राचार्य को तत्काल तलब किया। जनसुनवाइ में पहुंचे स्कूल के नवनियुक्त प्रिंसिपल चन्द्रकान्त शर्मा और पूर्व प्रिंसिपल प्रीति दीक्षित को डीपीसी संजय कुमार मिश्रा और डीईओ ने कड़ी चेतावनी देते हुए 24 घंटे के भीतर छात्रों की समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि निर्देशों का पालन नहीं होने की स्थिति में पांच सदस्यीय जांच समिति गठित कर कार्रवाई की जाएगी।
जनसुनवाई में छात्रों के साथ पहुंचे क्षेत्र के सरपंच जीतू चौधरी ने भी स्कूल प्रबंधन के रवैये पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि विद्यालय के लिए ग्रामीण क्षेत्र की जमीन कम कीमत में बच्चों के बेहतर भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के उद्देश्य से उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन आज उसी क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा से वंचित करने जैसी स्थिति पैदा हो रही है। उनके अनुसार इस निर्णय से 100 से अधिक छात्र प्रभावित हो रहे हैं।
अभिभावकों और छात्रों ने प्रशासन से मांग की है कि 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों की पढ़ाई पूर्ववत एमपी बोर्ड के अंतर्गत पूर्ण कराई जाए तथा उनके शैक्षणिक हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि वे छात्रों की हर संभव मदद कर रहे हैं उन्हें एमपी बोर्ड में किसी अन्य स्कूल में एडमिशन करना हो तो स्कूल प्रबंधन मदद करेगा या वे सीबीएसई में भी पढ़ सकते हैं। लेकिन छात्रों का कहना है कि वे अन्यत्र स्कूल क्यों जाएँ और सीबीएसई में भी क्यों पढ़ें जब उन्होने शुरू से एमपी बोर्ड इसी स्कूल में पढ़ा है। इस तरह बीच सत्र में यह तब्दीली उनके मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षिक सत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
दरअसल चोईथराम फाउंटेन स्कूल एक ट्रस्ट का स्कूल है जो कई दशकों से एमपीबोर्ड से संचालित हो रहा है। जिसमें ग्रामीण परिवेश के अधिकतर छात्र पढ़ रहे हैं लेकिन हाल ही में स्कूल का सीबीएसई बोर्ड की मान्यता का आवेदन स्वीकार हो गया है, जिससे पूरे स्कूल को सीबीएसई बोर्ड से संचालित किया जाएगा और स्कूल ने अपना एमपी बोर्ड का डायस कोड समर्पित कर दिया है, जिससे ग्रामीण परिवेश के सभी बच्चों पर संकट पैदा हो गया है जो सीबीएसई की अपेक्षाकृत अधिक फीस वहन नहीं कर सकते हैं क्योंकि वे अभी तक ट्रस्ट के माध्यम से न्यूनतम फीस में अध्यनरत रहे हैं।
अब यहाँ सवाल उठता है कि यह सभी छात्र कहाँ जाएँगे ? इनके भविष्य का क्या होगा ?
