नेहरू प्रतिमा (मधुमिलन चौराहा) से छावनी पुल रोड चौड़ीकरण मामला

इंदौर, 24 मार्च 2026। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, इंदौर खंडपीठ ने नेहरू प्रतिमा (मधुमिलन चौराहा) से छावनी पुल तक प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण के मामले में इंदौर नगर निगम द्वारा जारी नोटिस को निरस्त करते हुए निगम की कार्रवाई को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध माना है।

माननीय न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकलपीठ ने रिट याचिका क्रमांक 8502/2026 (बसंत कुमार रावत बनाम इंदौर नगर निगम एवं अन्य) में यह आदेश पारित किया।

याचिकाकर्ता बसंत कुमार रावत की ओर से अधिवक्ता जयेश गुरनानी ने तर्क रखा कि निगम के भवन अधिकारी, जोन-11 द्वारा 26 फरवरी 2026 को जारी नोटिस में 7 दिन के भीतर निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए थे, जबकि याचिकाकर्ता का निर्माण निगम से स्वीकृत नक्शे के अनुसार है। साथ ही, वर्ष 2014 के आदेश में सड़क की चौड़ाई 60 फीट (18 मीटर) निर्धारित थी, जबकि नोटिस में इसे 24 मीटर बताया गया, जो परस्पर विरोधाभासी है।

अधिवक्ता गुरनानी ने यह भी दलील दी कि इंदौर विकास योजना-2021 की वैधता समाप्त हो चुकी है और उसी आधार पर नोटिस जारी किया गया। साथ ही, सड़क की सेंट्रल एलाइनमेंट भी याचिकाकर्ता की उपस्थिति में निर्धारित नहीं की गई।

निगम की ओर से अधिवक्ता ऋषि तिवारी ने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने सेटबैक क्षेत्र में अवैध निर्माण किया है और पूर्व में हुए समझौते के तहत निगम को सड़क उपयोग का अधिकार है।

न्यायालय ने पाया कि याचिकाकर्ता को पर्याप्त व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया, जबकि उसकी संपत्ति हटाने जैसी कार्रवाई में यह आवश्यक था। इस आधार पर न्यायालय ने नोटिस को निरस्त करते हुए निगम को पुनः सुनवाई कर कारणयुक्त आदेश पारित करने के निर्देश दिए।

अदालत ने याचिकाकर्ता को 26 मार्च 2026 को संबंधित अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर पक्ष रखने का निर्देश दिया है। साथ ही, पुनः आदेश पारित होने तक और उसके 7 दिन बाद तक याचिकाकर्ता के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने के निर्देश भी दिए गए हैं।