इंदौर, 23 अप्रैल
शहर में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। जोन क्रमांक 22 के अंतर्गत ग्राम लसूडिया मोरी स्थित लुनिया कंपाउंड प्रकरण ने अब गंभीर रूप ले लिया है। नगर निगम की अनुमति के बिना खसरा क्रमांक 7/1/1/1 सहित अन्य भूमि पर विकसित इस कॉलोनी को लेकर लोकायुक्त संगठन ने जांच तेज कर दी है। साथ ही सर्वे नंबर 67/2/3 पर संचालित मेसर्स केमको चिव फूड्स प्रा. लि. भी जांच के दायरे में है।
इस मामले की शिकायत पूर्व पार्षद दिलीप कौशल ने 1 अक्टूबर 2024 को लोकायुक्त में दर्ज कराई थी। शिकायत में कई वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। लोकायुक्त ने प्रारंभिक जांच के आधार पर प्रकरण क्रमांक 354/24 दर्ज कर जांच शुरू की थी।
जांच के दौरान इंदौर नगर निगम द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन ने मामले को और गंभीर बना दिया है। निगम रिपोर्ट में 13 भवन अधिकारियों के नाम सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, कॉलोनी बिना वैधानिक अनुमति के विकसित की गई। इसके लिए आवश्यक शुल्क जमा नहीं किया गया और नियमों को दरकिनार कर अवैध प्लॉटिंग व निर्माण किया गया। इससे न केवल राजस्व को नुकसान हुआ, बल्कि शहरी नियोजन मानकों का भी उल्लंघन हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध कॉलोनियां शहर के नियोजित विकास के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। इन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा मानकों का अभाव रहता है, जिससे भविष्य में नागरिकों को जल निकासी, सड़क और बिजली जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
राज्य सरकार ने अवैध कॉलोनी निर्माण के मामलों में सख्ती बढ़ाते हुए नए प्रावधान लागू किए हैं। इनके तहत दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, यहां तक कि 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। वहीं, मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 292 के तहत जिम्मेदार अधिकारियों व संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सकती है।
लोकायुक्त सूत्रों के अनुसार जांच अब निर्णायक चरण में है और जल्द ही एफआईआर दर्ज होने की संभावना है। एजेंसी सभी दस्तावेजों, अनुमतियों और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच कर रही है, साथ ही अधिकारियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
मामले को लेकर नगर निगम में तनाव की स्थिति है। कई अधिकारी जांच के दायरे में आने के बाद सतर्क हो गए हैं और दस्तावेजों की समीक्षा कर रहे हैं, जबकि कुछ ने अपने बचाव की तैयारी शुरू कर दी है।
राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा गरमा गया है। विपक्ष ने प्रशासनिक मिलीभगत का आरोप लगाया है, जबकि सत्तापक्ष ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
स्थानीय नागरिकों ने अवैध कॉलोनियों पर सख्त कार्रवाई के साथ-साथ वहां रह रहे लोगों के हितों की सुरक्षा की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि कार्रवाई के साथ जागरूकता भी जरूरी है, ताकि लोग प्लॉट खरीदने से पहले उसकी वैधानिक स्थिति की जांच कर सकें।
फिलहाल, लुनिया कंपाउंड प्रकरण इंदौर में अवैध निर्माण के खिलाफ चल रही मुहिम का बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के बाद प्रशासन कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है और क्या इससे भविष्य में अवैध कॉलोनियों पर प्रभावी रोक लग पाती है।
