जल संरक्षण, सप्लाई सिस्टम सुधार और वर्षा जल संचयन पर विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

इंदौर, 29 मई 2026 :

इंदौर में बढ़ते जल संकट को लेकर गुरुवार 29 मई की शाम एआईसीटीएसएल स्थित स्मार्ट सिटी ऑफिस में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शहर के बुद्धिजीवियों, पर्यावरणविदों, व्यापारिक संगठनों और गणमान्य नागरिकों के साथ “जल संवाद” कार्यक्रम आयोजित किया। बैठक में जल संरक्षण, सतत विकास और शहर के जल प्रबंधन को लेकर विभिन्न सुझाव और सहभागिता पर चर्चा की गई।

इंजीनियर अजीत नारंग ने कहा कि जल संकट के समाधान के लिए नई नीतियों की आवश्यकता नहीं है, बल्कि पहले से बनी सरकारी नीतियों का सही तरीके से क्रियान्वयन जरूरी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1993 में बनी राष्ट्रीय जल नीति और समय-समय पर उसमें किए गए संशोधनों का यदि शासन स्वयं पालन कर ले, तो जल संकट की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है।

पर्यावरण विशेषज्ञ सुनील व्यास ने शहर में वर्षा जल संरक्षण के लिए नहर निर्माण और पारंपरिक जल संरचनाओं को विकसित करने की आवश्यकता बताई।

भू जल विशेषज्ञ सुधीन्द्र मोहन शर्मा ने कहा कि जिन इलाकों में नलकूप सूख गए हैं, निगम उन्हें हॉटस्पॉट मानकर वहां विशेष काम करे।

मुकेश चौहान ने कहा कि गर्मी में बोरिंग करवाने पर प्रतिबंध लगाया जाता है जबकि मई में ही बोरिंग कराने से बोरिंग सूखेंगे नहीं।

प्रोफेसर एस एल गर्ग ने कहा कि कुएं- बावड़ियों में जामुन की छाल डालने से पानी साफ रहेगा।

गुरुसिंघ सभा के मोनू भाटिया ने कहा कि सिख समाज 100 से अधिक स्थानों पर वाटर रिचार्जिंग करवाया। उन्होंने बताया कि सभी गुरुद्वारों में वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था पहले से मौजूद है।

बैठक में अग्रवाल समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि शहर में पानी की मात्रा बढ़ाना संभव नहीं है, लेकिन सप्लाई सिस्टम को बेहतर बनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने नगर निगम से शहर के करीब 6000 ट्यूबवेलों पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। साथ ही जल गुणवत्ता की निगरानी के लिए अलग टीम बनाने और रास्ते में टैंकर रोककर पानी के सैंपल लेने का सुझाव दिया। उन्होंने बर्फ फैक्ट्रियों में उपयोग होने वाले पानी की भी जांच की आवश्यकता बताई।

होटल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट सुमित सूरी ने कहा कि शहर के सभी होटलों में वाटर रिचार्ज सिस्टम लगाने के लिए व्यापारी संगठन आगे आएंगे। उन्होंने कहा कि 10 से 15 दिनों में इसकी समीक्षा भी की जा सकती है। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि व्यापारी संगठनों द्वारा वाटर रिचार्ज सिस्टम पर एक साल तक विशेष डिस्काउंट दिया जाए और नगर निगम इसके लिए प्रमाणित कार्ड जारी करे।

क्लॉथ मार्केट एसोसिएशन के कैलाश मुंगड़ ने कहा कि फुटपाथों पर पूरी तरह ब्लॉक पेवर लगाने के बजाय कुछ हिस्से कच्चे छोड़े जाएं ताकि वर्षा का पानी जमीन में समा सके और भूजल स्तर बढ़ सके।

जल संवाद के दौरान शहर में पानी की बर्बादी रोकने, वर्षा जल संचयन, जल गुणवत्ता निगरानी और जनभागीदारी आधारित जल प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है। 

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