भागीरथपुरा जल संकट :कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट तो आई, लेकिन स्वास्थ्य आंकड़े गायब — निगम ने शासन पर डाली जिम्मेदारी
इंदौर , 03 जनवरी 2026 : भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति से फैले संकट को लेकर इंदौर नगर निगम एवं शासन की ओर से हाईकोर्ट में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट 2 जनवरी को पेश की गई है। रिपोर्ट में नगर निगम प्रशासन ने दावा किया है कि घटना के तुरंत बाद प्रभावित क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति, स्वास्थ्य सुरक्षा, पाइपलाइन सुधार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की गई। लेकिन कितने मरीज प्रभावित हुए, कितनों की मौत हुई, कितने स्वस्थ हुए, यह जानकारी नहीं दी गई । यह स्टेट्स रिपोर्ट महेश गर्ग द्वारा दायर जनहित याचिका के संबंध में दी गई है।
नगर निगम की ओर से executive इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव की ओर से पेश इस 13 पन्ने की रिपोर्ट में महज 3 पन्नों में भागीरथपुरा दूषित जल संकट की जानकारी दी गई है, जबकि स्वास्थ्य संबंधी जानकारी राज्य शासन की तरफ से देने का कहा गया है। निगम ने कोर्ट को ये तो बताया कि दूषित पानी के सैंपल लिए हैं लेकिन सैंपल की जांच में क्या आया, ये नहीं बताया गया है ।
स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए लगातार टैंकर लगाए गए। 30 दिसंबर 2025 को 36 टैंकर, 31 दिसंबर को 34 टैंकर, 1 जनवरी 2026 को 33 टैंकर तैनात किए गए। नगर निगम ने टैंकरों से स्वच्छ पानी आपूर्ति के फोटो भी कोर्ट में प्रस्तुत किए हैं।
स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के उपाय
रिपोर्ट में कहा गया है कि नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और CMHO की 32 टीमें, जिनमें 100 से अधिक कर्मचारी शामिल हैं, मौके पर तैनात की गईं। लोगों को लगातार पानी उबालकर और फिल्टर कर उपयोग करने की घोषणाएं करवाई जा रही हैं।
पानी की गुणवत्ता जांच के लिए 29 दिसंबर की रात 20 सैंपल, 30 दिसंबर की सुबह 30 से अधिक सैंपल विभिन्न इलाकों से लिए गए। रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि भागीरथपुरा पुलिस स्टेशन के पास संभावित प्रदूषण बिंदु की पहचान की गई। वहां मौजूद एक संरचना को हटाकर उसके नीचे की क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत कर दी गई है। साथ ही पूरे क्षेत्र की सीवर लाइनों और मैनहोल्स की सफाई करवाई जा रही है।
अधिकारियों पर कार्रवाई
निगम प्रशासन ने कोर्ट को बताया कि 30 दिसंबर 2025 को जोन क्रमांक-04 के जोनल अधिकारी को निलंबित, एक असिस्टेंट इंजीनियर और एक सब-इंजीनियर की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। इन आदेशों की प्रतियां रिपोर्ट के साथ संलग्न की गई हैं।
कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन नंबर जारी
शिकायतों के समाधान के लिए 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। इसके अलावा ICCC (इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर) में 11 टीमें शिकायतों के निराकरण में लगी हैं। शिकायतें 181 सीएम हेल्पलाइन, 311 मेयर हेल्पलाइन ऐप और ICCC नंबरों के माध्यम से ली जा रही हैं। ICC helpline numbers 18002331311 / 9174311311 और 9174311811 हैं। 181 सीएम हेल्पलाइन और 311 एप्प पर आने वाली शिकायतें करीब से मॉनिटर की जा रही हैं।
मौजूदा स्थिति पर निगरानी
रिपोर्ट में बताया गया है कि जल वितरण लाइनों का सर्वे और मैपिंग की जा रही है, ताकि आगे किसी अन्य स्थान से दूषित पानी की आशंका न रहे। जल प्रदाय और सीवरेज विभाग की टीमें आपस में समन्वय कर काम कर रही हैं। 1 जनवरी को शहरी प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव ने भी प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया।
स्वास्थ्य प्रभाव की जानकारी राज्य सरकार के जिम्मे
रिपोर्ट के अंत में नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि कितने लोग प्रभावित हुए, कितने अस्पताल में भर्ती हुए और उन्हें क्या चिकित्सा सुविधा दी गई—इसका विवरण राज्य सरकार द्वारा अलग से प्रस्तुत किया जाएगा।
जहां एक ओर प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई और अधिकारियों पर कदम उठाने का दावा किया है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य नुकसान और प्रभावितों के आंकड़ों को लेकर तस्वीर अब भी पूरी तरह साफ नहीं हो सकी है, जिस पर कोर्ट की आगे की सुनवाई टिकी है।
