इंदौर में जैन समुदाय के योगदान पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, अर्थव्यवस्था व परोपकार में अहम भूमिका


इंदौर:
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) द्वारा इंदौर में “भारतीय अर्थव्यवस्था, शिक्षा और परोपकार में जैन समुदाय का योगदान” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभर से आए विद्वानों, नीति-निर्माताओं और सामाजिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

परोपकार जैन समाज की पहचान
संगोष्ठी को केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने कहा कि परोपकार जैन समाज की पहचान है और यह समुदाय अस्पतालों, धर्मशालाओं, गौशालाओं तथा सामुदायिक रसोई के माध्यम से समाज की सेवा करता है। जैन उद्यमी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हुए रोजगार सृजन और नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।
विकसित भारत 2047 में जैन समाज की भूमिका
रिजिजू ने आगे कहा कि जैन समुदाय के विकसित भारत 2047 के विजन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। सरकार पीएम विकास और प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम जैसी योजनाओं के माध्यम से जैन युवाओं और संस्थानों को सशक्त बना रही है।


जैन समुदाय अपनी जनसँख्या बढ़ाए तो देश की जीडीपी बढ़ेगी—जॉर्ज कुरियन

कार्यक्रम में अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि जैन समाज न केवल अहिंसा और परोपकार में अग्रणी है, बल्कि देश के प्रमुख करदाताओं में भी शामिल है। उन्होंने चुटीले अंदाज में कहा , जब 0.4 प्रतिशत जैन समाज देश की जीडीपी में २२ से २५ प्रतिशत योगदान दे रहे हैं तो यदि इनकी जनसँख्या बढ़ती है तो देश की इकोनॉमी में और भी वृद्धि होगी। उन्होंने मजाकिया लहजे में पूछा कि इतना पैसा इनके पास कहाँ से आता है ?

एनसीएम की सदस्य एस. मुनव्वरी बेगम ने जैन समुदाय की सेवा भावना की सराहना की। वहीं सदस्य बेरजिस देसाई ने कहा कि अहिंसा और बहुलवाद के जैन मूल्य आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं। आयोग की सचिव अलका उपाध्याय ने समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।

उद्घाटन सत्र को मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राकेश सिंघई, शांतिलाल मुथा और जैन इंटरनेशनल ट्रेडिंग ऑर्गनाइजेशन के प्रतिनिधि कमलेश सोजतिया ने संबोधित किया।


तकनीकी सत्रों में विस्तृत चर्चा
संगोष्ठी के तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने जैन समुदाय की व्यापार, उद्योग और उद्यमिता में भूमिका पर प्रकाश डाला। साथ ही शिक्षा और परोपकार के क्षेत्र में उनके योगदान को रेखांकित किया गया। दूसरे सत्र में जैन धर्म और भारतीय ज्ञान प्रणाली पर चर्चा करते हुए अहिंसा, अनेकांतवाद और अपरिग्रह जैसे सिद्धांतों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ और अंत में राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *