उज्जैन/इंदौर, 29 अगस्त — उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह को लेकर चल रहे विवाद में इंदौर उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। जनहित याचिका में आम भक्तों को भी गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति दिए जाने की मांग की गई है, जबकि वर्तमान में केवल नेता, प्रभावशाली व्यक्ति या VIP श्रद्धालुओं को ही प्रवेश मिलता है। 

याचिका इंदौर निवासी दर्पण अवस्थी ने अपने वकील चर्चित शास्त्री के माध्यम से दायर की थी। याचिका में कहा गया कि देशभर से आ रहे लाखों श्रद्धालुओं को केवल गर्भगृह से बाहर से ही दर्शन करने की अनुमति है, जबकि कुछ लोगों को विशेष रूप से अंदर पूजा-अर्चना तक करने की छुट दी गई है। उन्होंने इस भेदभाव और ‘VIP संस्कृति’ पर सवाल उठाते हुए सभी भक्तों के लिए समान अवसर और नीति निर्माण की मांग की है। 

इस मामले में हुई सुनवाई में इंदौर उच्च न्यायालय की खंडपीठ—जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी—ने याचिका की सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। 

याचिकाकर्ता ने यह भी उल्लेख किया कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत यह जानना चाहा गया था कि गर्भगृह में VIP व्यक्तियों को प्रवेश की अनुमति किसके आदेश पर दी जाती है, लेकिन मंदिर समिति ने इस पर कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया। 

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।