दूषित पानी कांड पर हाई कोर्ट सख्त, एक और याचिका लगी, दो इंटरवीनर आए सामने

शासन ने पेश की स्टेटस रिपोर्ट, अगली सुनवाई 6 को

इंदौर, 02 जनवरी 2026: देश की सबसे स्वच्छ नगरी इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों और सैकड़ों नागरिकों के बीमार होने के मामले में इंदौर हाई कोर्ट में दायर तीन जनहित याचिकाओं पर आज सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अलग–अलग याचिकाओं और इंटरवीनरों की ओर से गंभीर मुद्दे उठाए गए, जिस पर युगल पीठ ने शासन से जवाब तलब किया। दो हिस्सों में 11 मिनट चली सुनवाई। जस्टिस द्वारकधीश बंसल और जस्टिस राजेन्द्र कुमार वानी की युगल पीठ ने वीडियो कोन्फ्रेंस के माध्यम से अधिवक्ताओं को सुना।

ये बताया है स्टेट्स रिपोर्ट में

शासकीय अधिवक्ता ने अदालत को विस्तृत स्टेट्स रिपोर्ट सौंपी। स्टेट्स रिपोर्ट में अदालत को बताया गया है कि प्रभावित नागरिकों को समुचित इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। निजी अस्पतालों में निगरानी के लिए तहसीलदार और पटवारियों की भी तैनाती की गई है। निगम के टैंकरों के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों में नियमित रूप से स्वच्छ पानी पहुंचाया जा रहा है।

अपुष्ट आंकड़ों से प्रभावितों का मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ रहा — खंडेलवाल

एक जनहित याचिका में अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल इंटरवीनर के रूप में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट के समक्ष कहा कि मीडिया और सोशल मीडिया पर 14 या उससे अधिक मौतों की खबरें चलाई जा रही हैं, जो आधिकारिक तौर पर प्रमाणित नहीं हैं। इससे भागीरथपुरा के रहवासियों में भय का माहौल बन गया है। जो लोग बीमार हैं, वे भी अपनी जान को लेकर डरे हुए हैं, वहीं छोटे बच्चे भी इन भ्रामक खबरों से मानसिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। अधिवक्ता खंडेलवाल ने तर्क दिया कि मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी विज्ञप्ति में अब तक केवल 4 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की गई है। इस आवेदन पर हाई कोर्ट ने शासन को नोटिस जारी किए हैं। इस याचिका में अगली सुनवाई संभावित रूप से 6 जनवरी को हो सकती है।

जब फायर ब्रिगेड तंग रास्ते से जा सकती है तो पानी के टैंकर क्यों नहीं ?

इसी मामले में आज एक नई जनहित याचिका एडवोकेट मोहन सिंह चंदेल द्वारा दायर की गई। अधिवक्ता चंदेल ने कोर्ट को बताया कि भागीरथपुरा में अभी भी कई स्थानों पर पानी के टैंकर नहीं पहुंच रहे हैं। इस पर कोर्ट ने शासन को आदेश दिया कि एक घंटे के भीतर पानी के टैंकर प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचाए जाएं। शासन के अधिवक्ता ने जवाब में कहा कि टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन कुछ स्थानों पर रास्ते संकरे होने के कारण टैंकर नहीं पहुंच पा रहे हैं। इस पर कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि जब आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड तंग रास्तों में जा सकती है, तो पानी की सप्लाई के लिए फायर ब्रिगेड का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा सकता।

अधिवक्ता चंदेल ने अपने आवेदक के पिता की दूषित पानी से हुई मौत पर 10 लाख रुपये मुआवजे की मांग भी शासन के समक्ष रखी। इस याचिका में कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 19 जनवरी तय की है।

ट्रेजर टाउनशिप में भी आ रहा दूषित पानी

इन याचिकाओं में एक अन्य इंटरवीनर के रूप में अधिवक्ता अनिल ओझा भी उपस्थित हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि वार्ड क्रमांक 13 ट्रेजर टाउनशिप क्षेत्र में बीते 4–5 महीनों से दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है, जिसके चलते वहां के रहवासी बोतलबंद पानी पीने को मजबूर हैं।
अधिवक्ता ओझा ने कॉलोनाइजर मनीष कालानी पर आरोप लगाते हुए कहा कि नर्मदा जल लाइन और सीवेज लाइन साथ–साथ डाली गई हैं, जिससे सीवेज का पानी नर्मदा लाइन में मिलने की आशंका है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में शासन–प्रशासन, नगर निगम की 311 ऐप और सीएम हेल्पलाइन पर कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई राहत नहीं मिली, जिसके बाद मजबूरन हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अगली सुनवाई 6 जनवरी को हो सकती है।

वहीं इस मामले में मुख्य जनहित याचिका, जो हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इनानी और अधिवक्ता मनीष यादव द्वारा लगाई गई है, उस पर भी कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 6 जनवरी निर्धारित की है। अधिवक्ता रितेश इनानी ने बताया कि शासन ने दूषित जल से 4 मौतों की जानकारी सौंपी है।

हाई कोर्ट में चल रही इन सुनवाइयों के बाद अब पूरे मामले पर शासन की कार्रवाई और अदालत के निर्देशों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।