भागीरथपुरा दूषित जल मामला: हाईकोर्ट सख्त, 15 जनवरी को मुख्य सचिव को होने के आदेश
इंदौर, 06 जनवरी 2025: इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार होने के मामले में सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगल पीठ ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि दूषित पानी की समस्या केवल इंदौर शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रदेश की गंभीर समस्या है। हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पेश होकर यह बताने के निर्देश दिए हैं कि राज्यभर में दूषित पेयजल की रोकथाम के लिए अब तक क्या ठोस और प्रभावी कदम उठाए गए हैं। युगल पीठ ने शासन को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि दूषित पानी की वजह से इंदौर की विश्व स्तर पर बनी छवि को नुकसान पहुंचा है।
उल्लेखनीय है भागीरथपुरा में दूषित पानी से सैकड़ों लोगों के बीमार और 17 मौतों के मामले में इंदौर हाई कोर्ट में कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है।
कोर्ट ने राज्य सरकार और इंदौर नगर निगम को निर्देश दिए हैं कि वे अपना विस्तृत जवाब दाखिल करें और एक नई स्टेटस रिपोर्ट पेश करें। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में स्वच्छ पेयजल का अधिकार भी शामिल है।
हाईकोर्ट ने शासन को निर्देश दिए कि—
एनएबीएल एक्रिडिटेड लैब से मल्टीपल पॉइंट्स पर पानी की गुणवत्ता की जांच कराई जाए
जहां-जहां सिवेज और वाटर लाइन साथ-साथ जा रही हैं, वहां पाइपलाइन सुधारी या बदली जाए
ऑनलाइन वाटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया जाए
निरीक्षण प्रोटोकॉल तय किए जाएं
इंदौर शहर के लिए लॉन्ग टर्म वाटर सेफ्टी प्रोग्राम तैयार किया जाए
प्रभावित पीड़ितों के लिए क्षतिपूर्ति (मुआवजा) दिया जाए
हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले से जुड़े मुद्दों को सात श्रेणियों में विभाजित किया है—
- प्रभावित लोगों के लिए तत्काल और आपात निर्देश
- रोकथाम और सुधारात्मक उपाय
- जिम्मेदारी तय करना
- अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई
- मुआवजा
- स्थानीय निकायों को निर्देश
- जन-जागरूकता और पारदर्शिता
अधिवक्ताओं के तर्क
अधिवक्ता अभिनव धनोतकर ने कहा कि न तो लोगों को साफ पानी मिल रहा है और न ही समुचित इलाज। उन्होंने रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में डॉक्टरों और इंजीनियरों की एक हाई पावर कमेटी गठित करने की मांग की। इस पर कोर्ट ने कहा कि पहले मुख्य सचिव का जवाब आने दिया जाए, उसके बाद कमेटी पर विचार किया जाएगा ।
अधिवक्ता अजय बागड़िया ने कहा कि 2017-18 की प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में 60 में से 59 सैंपल फेल हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर में भ्रष्टाचार इतना बढ़ गया है कि अधिकारी आते हैं, शहर को चारागाह समझते हैं और अपना हिस्सा ले जाते हैं।
अधिवक्ता मनीष यादव ने कहा कि नगर निगम की लैब में पानी के सैंपल की जांच नहीं हो रही, जबकि इस लैब पर 10 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि केवल सस्पेंड या विभागीय जांच से काम नहीं चलेगा, निर्दोष नागरिकों की मौत हुई है, इसलिए जिम्मेदारों पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए।
अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल की याचिका पर कोर्ट ने कलेक्टर को निर्देश दिए कि सोशल मीडिया पर फैल रही फेक न्यूज से पैनिक की स्थिति बन रही है, इस पर लगाम लगाई जाए। इस पर अधिवक्ता रितेश इनानी ने कहा कि शासन सही जानकारी दे, आंकड़े छुपाए जा रहे हैं। उन्होंने कोविड काल की तरह भागीरथपुरा मामले में रोजाना शाम को हेल्थ बुलेटिन जारी करने की मांग की, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
अधिवक्ता अनिल ओझा की याचिका पर ट्रेजर टाउनशिप क्षेत्र में नगर निगम को साफ पानी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए।
अधिवक्ता मोहन सिंह चंदेल ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के आदेश के बावजूद भागीरथपुरा में टैंकर से साफ पानी नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सुनवाई में नगर निगम ने शपथपत्र पर झूठी जानकारी दी थी कि क्षेत्र में साफ पानी पहुंचाया जा रहा है। युगल पीठ ने कहा मुख्य सचिव को तलब किया है।
अब इस पूरे मामले की अगली अहम सुनवाई 15 जनवरी को होगी, जब प्रदेश के मुख्य सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हाईकोर्ट के सामने अपना पक्ष रखेंगे।
