विश्व पर्यावरण दिवस : कृषि महाविद्यालय इंदौर में जलवायु परिवर्तन और मृदा स्वास्थ्य पर जागरूकता कार्यक्रम
इंदौर, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कृषि महाविद्यालय, इंदौर में अखिल भारतीय समन्वित बरानी कृषि अनुसंधान परियोजना के तहत जलवायु परिवर्तन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन विषय पर हाइब्रिड जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में विभिन्न जिलों के किसान, वैज्ञानिक, कृषि विभाग के अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ तथा छात्र-छात्राएं शामिल हुए। मुख्य वक्ता केंद्रीय शुष्क कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद के वैज्ञानिक डॉ. के.वी. राव ने अल नीनो जैसी जलवायु घटनाओं के कृषि पर प्रभाव और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों के लिए विकसित “सूखा रक्षक” मोबाइल ऐप की उपयोगिता भी बताई।
भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. बृजेन्द्र सिंह ने मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और संतुलित पोषण प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता और पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो रहा है।
महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. भरत सिंह ने कहा कि नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश के असंतुलित उपयोग से मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ रहा है। उन्होंने टिकाऊ कृषि पद्धतियों और संतुलित उर्वरक उपयोग को समय की आवश्यकता बताया।
कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकार की कृषि एवं जल संरक्षण योजनाओं की जानकारी भी दी गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को “कृषि वर्ष” घोषित किया है।
अंत में सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन, मृदा स्वास्थ्य सुरक्षा और जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने का संकल्प लिया।
मुख्य बिंदु
जलवायु परिवर्तन और मृदा स्वास्थ्य पर विशेषज्ञों ने दिए सुझाव।
अल नीनो के कृषि पर प्रभाव और बचाव के उपायों पर चर्चा।
“सूखा रक्षक” मोबाइल ऐप की जानकारी किसानों को दी गई।
रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग पर चिंता व्यक्त।
टिकाऊ और जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर जोर।
