कामकाजी महिलाओं को मिलेगा सुरक्षित वातावरण, हर संस्था में बनी समिति होगी यौन उत्पीड़न की निगरानी में सक्रिय

भोपाल/इंदौर।
महिला कर्मचारियों को कार्यस्थलों पर सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग, मध्यप्रदेश ने सभी शासकीय और अशासकीय कार्यालयों में ‘आंतरिक परिवाद समिति’ (Internal Complaints Committee – ICC) का गठन अनिवार्य कर दिया है।

यह निर्देश कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और प्रतितोष अधिनियम 2013 (POSH Act) के तहत जारी किया गया है।

📌 मुख्य बिंदु:

  • प्रत्येक संस्था में चार सदस्यीय समिति का गठन अनिवार्य होगा, जिसमें एक वरिष्ठ महिला अधिकारी अध्यक्ष के रूप में होंगी।
  • समितियों को समय-समय पर शिकायतों की जांच और रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
  • यदि कोई संस्था समिति गठित नहीं करती है, तो उस पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया जाएगा।
  • पुनरावृत्ति की स्थिति में संस्था का लाइसेंस/पंजीयन तक रद्द किया जा सकता है।

🧩 आदेश का उद्देश्य:

  • महिलाओं को कार्यस्थल पर सुरक्षित, गरिमापूर्ण और निष्पक्ष माहौल प्रदान करना।
  • यौन उत्पीड़न की शिकायतों का तेजी से और निष्पक्ष निवारण सुनिश्चित करना।
  • कार्यस्थल पर लैंगिक समानता और संवेदनशीलता को बढ़ावा देना।

📝 किन्हें करना होगा पालन:

  • सभी सरकारी विभाग, सार्वजनिक उपक्रम (PSUs), शिक्षण संस्थान, निजी कंपनियाँ, अस्पताल, बैंक और NGOs आदि इस आदेश के दायरे में आएंगे।

🗣️ विभागीय बयान:

“लैंगिक संवेदनशीलता को लेकर समाज और संस्थानों में समान चेतना लाना समय की आवश्यकता है। यह सिर्फ एक कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि महिलाओं की गरिमा और अधिकारों का सवाल है।”
— महिला एवं बाल विकास विभाग, म.प्र.

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।