443 करोड़ की वसूली, सबसे अमीर भाजपा विधायक की खदानों पर सरकार की टेढ़ी नजर
भोपाल, 06 अगस्त 2025 | भोपाल की राजनीतिक फिजाओं में खनन घोटाले को लेकर जबरदस्त तूफान मचा हुआ है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को विधानसभा में स्पष्ट किया कि पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक संजय पाठक से जुड़ी तीन खनन कंपनियों—आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन, निर्मला मिनरल्स और पैसिफिक एक्सपोर्ट—से 443 करोड़ 4 लाख 86 हजार 890 रुपये की वसूली की जाएगी।
इस मामले ने सियासी हलकों में सनसनी फैला दी है, क्योंकि संजय पाठक राज्य के सबसे अमीर विधायकों में गिने जाते हैं। मुख्यमंत्री के इस रुख को जहां विपक्ष ने सराहा है, वहीं भाजपा के भीतर इसे लेकर हलचल बढ़ गई है।
शिकायत से उठा मामला, जांच में पुष्टि
जबलपुर के सिहोरा निवासी आशुतोष मनु दीक्षित ने 31 जनवरी 2025 को आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उपरोक्त तीनों कंपनियों ने स्वीकृत मात्रा से कई गुना अधिक खनन किया, जिससे सरकार को 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ।
इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए खनिज साधन विभाग ने 23 अप्रैल को एक जांच समिति गठित की। समिति ने 6 जून को रिपोर्ट सौंपी, जिसमें सैटेलाइट डेटा और IBM की रिपोर्ट के आधार पर अवैध खनन की पुष्टि हुई और 443 करोड़ से अधिक की वसूली का प्रस्ताव रखा गया।
मुख्यमंत्री का कड़ा संदेश: ‘अनियमितता बर्दाश्त नहीं’
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा,
“खनन में किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साक्ष्यों के आधार पर दोषियों से वसूली की जाएगी, जीएसटी की राशि अलग से जोड़ी जाएगी।”
उनके इस बयान को खनन माफिया पर नकेल कसने की दिशा में एक सख्त कदम माना जा रहा है।
कंपनियों का पलटवार: रिपोर्ट अनुमानित, पक्ष नहीं सुना गया
संजय पाठक से जुड़ी कंपनियों ने अपने संयुक्त बयान में इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे 115 वर्षों से खनन कार्य में पारदर्शिता के साथ कार्य कर रही हैं और उनके खिलाफ पहले कभी टैक्स चोरी का कोई मामला सामने नहीं आया।
कंपनियों का आरोप है कि
“जांच दल ने हमारे किसी भी प्रतिनिधि से बातचीत नहीं की, न ही साइट का निरीक्षण किया। रिपोर्ट पूरी तरह अनुमानित आंकड़ों पर आधारित है।”
उन्होंने प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर सुनवाई का अवसर मांगा, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला।
विपक्ष का हमला: ‘खनिज विभाग पहले क्या कर रहा था?’
कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह और हेमंत कटारे ने सदन में सरकार से तीखे सवाल किए कि जब इतने बड़े पैमाने पर अनियमितता हो रही थी, तब विभाग क्या कर रहा था? मंगलवार को प्रश्नकाल में इस विषय पर चार सवाल उठाए गए, जिससे सदन में काफी हंगामा भी हुआ।
सियासी बवंडर: भाजपा में भी बेचैनी
संजय पाठक के नाम का इस घोटाले से जुड़ना भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। मुख्यमंत्री का यह कदम भाजपा के भीतर भी तनाव बढ़ा सकता है, क्योंकि संजय पाठक पार्टी के प्रभावशाली नेताओं में शुमार हैं।
कानूनी लड़ाई की तैयारी, लंबी खींचतान के आसार
कंपनियों ने कोर्ट जाने की तैयारी शुरू कर दी है। वहीं, खनिज विभाग ने वसूली की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। सूत्रों के अनुसार, GST की राशि जुड़ने पर यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यह विवाद लंबे समय तक खिंच सकता है।
CM की सख्ती या सियासी स्कोर?
भोपाल का यह खनन विवाद अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं रहा, बल्कि भाजपा की आंतरिक राजनीति और पारदर्शिता की परीक्षा भी बन चुका है। क्या मुख्यमंत्री मोहन यादव पार्टी से ऊपर उठकर कानून का पालन करवाएंगे? या यह मामला भी राजनीतिक समझौतों की भेंट चढ़ेगा? आने वाले दिन मध्य प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करेंगे।
