रामबाग मुक्तिधाम में तामसिक कृत्य, मृतक की अस्थियां गायब – गरिमा के साथ अंतिम संस्कार का अधिकार फिर सवालों में

जैन मृतक की चिता पर अंडे–शराब मिले, गरिमा के साथ अंतिम संस्कार पर सवाल

इंदौर, 23 अगस्त।

इंदौर के रामबाग मुक्तिधाम से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां जैन समाज के सात्विक व्यक्ति की चिता पर अज्ञात शख्स द्वारा तांत्रिक क्रिया किए जाने का आरोप लगा है। रानी सती गेट निवासी मृतक हुकुमचंद सुहाना का गुरुवार को अंतिम संस्कार किया गया था। मृतक के दामाद सनी जैन ने बताया कि जब अगले दिन अस्थि संचय के लिए मुक्तिधाम गए तो वहां चिता पर अंडे, शराब, सिगरेट, हल्दी-कुमकुम और अन्य सामग्री मिली।  इससे भी गंभीर बात यह है कि मृतक की खोपड़ी और कई अस्थियां भी गायब पाई गईं।

वहीं परिजन संजू जैन ने आरोप लगाया कि मुक्तिधाम परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे घटना के समय बंद थे, जिससे पूरी वारदात रिकॉर्ड नहीं हो सकी। उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की बात कही है। घटना से जैन समाज के लोगों में आक्रोश है और उन्होंने मुक्तिधाम जैसी पवित्र जगह पर इस तरह के टोटके को बेहद निंदनीय बताते हुए सुरक्षा इंतज़ाम कड़े करने की मांग की है।

संविधान कहता है: गरिमा के साथ अंतिम संस्कार का अधिकार

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 हर व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी कई ऐतिहासिक व्याख्याओं में साफ कहा है कि यह अधिकार मृत्यु के बाद भी जारी रहता है और हर इंसान का “गरिमा के साथ अंतिम संस्कार/दफन” करना उसका मौलिक अधिकार है।

2014 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था –

👉 “Right to dignity and fair treatment is not only available to a living man but also to his body after death.”

इसी तरह कोविड-19 काल में अदालतों ने स्पष्ट किया था कि मृतक का दाह संस्कार/दफन धार्मिक रीति-रिवाजों और गरिमा के साथ होना जरूरी है।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।