इंदौर, 05 जनवरी 2026: शहर में साइबर ठगों द्वारा अपनाए जा रहे डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों का एक गंभीर मामला सामने आया है। कल्याण संपत कॉलोनी निवासी 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला को अज्ञात साइबर अपराधियों ने एक दिन तक मानसिक दबाव में रखकर डिजिटल अरेस्ट जैसी स्थिति में फंसा लिया, हालांकि उनकी बेटी की सूझबूझ और राज्य साइबर सेल इंदौर की त्वरित कार्रवाई से बड़ी ठगी होने से बचाव हो गया।

जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग महिला की बेटी को जब लगातार मां के कॉल रिसिव न होने और मोबाइल व्यस्त रहने पर संदेह हुआ, तो उन्होंने तत्काल स्टेट साइबर सेल इंदौर से संपर्क किया। उप-पुलिस अधीक्षक नरेन्द्र सिंह रघवंशी को सूचना मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में निरीक्षक अंजू पटेल ने तुरंत कार्रवाई शुरू की।

इस तरह ठगी का प्रयास

बताया गया कि शनिवार को महिला की बेटी, जो एक बैंक में वरिष्ठ पद पर पदस्थ हैं, कार्यालय में थीं। इसी दौरान व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए एक अज्ञात व्यक्ति ने स्वयं को सीबीआई अधिकारी बताकर बुजुर्ग महिला को डराया। ठग ने उनके बैंक खाते में 6 करोड़ रुपये की संदिग्ध राशि क्रेडिट होने का दावा करते हुए वेरिफिकेशन के नाम पर दबाव बनाया।

साइबर ठगों ने महिला को किसी से बात न करने, अन्य कॉल रिसिव न करने और लगातार वीडियो कॉल पर बने रहने के निर्देश दिए। मोबाइल को बैग में रखने और डिसकनेक्ट न करने को कहा गया, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। एटीएम डिटेल मांगे जाने पर महिला ने बेटी से एटीएम की फोटो मंगाने का दबाव बनाया, लेकिन बेटी ने मीटिंग के बाद बात करने को कहा।

इसके बाद आरोपी ने महिला को बैंक जाकर आरटीजीएस के जरिए चार लाख रुपये ट्रांसफर करने की धमकी दी। जब बुजुर्ग महिला केनरा बैंक पहुंचीं और आरटीजीएस की बात कही, तो ब्रांच मैनेजर को संदेह हुआ। मैनेजर ने उनके पुत्र से संपर्क किया, जो स्वयं भी बैंक में वरिष्ठ पद पर पदस्थ हैं। उन्होंने तुरंत लेन-देन से मना कर दिया।

इसी दौरान महिला की बेटी ने राज्य साइबर सेल से संपर्क किया। निरीक्षक अंजू पटेल बैंक पहुंचीं और महिला का मोबाइल अपने कब्जे में लेकर साइबर अपराधियों की निगरानी तत्काल बंद कराई। मोबाइल सेटिंग में संदिग्ध नंबर ब्लॉक कराए गए और एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई गई। बाद में बुजुर्ग महिला को सुरक्षित उनके घर पहुंचाया गया, जहां साइबर सेल द्वारा उनकी काउंसलिंग की गई। उन्हें अज्ञात कॉल, वीडियो कॉल और बैंक से जुड़ी किसी भी जानकारी साझा न करने की सख्त सलाह दी गई। समय रहते की गई कार्रवाई के चलते महिला से किसी भी प्रकार की राशि ट्रांसफर नहीं हो सकी। यह मामला एक बार फिर चेतावनी है कि फर्जी सीबीआई/ईडी कॉल और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी के प्रयास तेजी से बढ़ रहे हैं, जिनसे बचाव के लिए सतर्कता और तुरंत साइबर सेल से संपर्क करना बेहद जरूरी है।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।