हादसा नहीं, बल्कि संगठित सरकारी अपराध-कांग्रेस

इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार होने के मामले ने सियासी तूफ़ान खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को “हादसा नहीं, बल्कि संगठित सरकारी अपराध” करार देते हुए दोषी मंत्रियों के तत्काल इस्तीफे, पीड़ित परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवज़ा और जिम्मेदारों पर तत्काल आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Jitu Patwari ने भागीरथपुरा पहुंचकर कहा कि इंदौर को सरकारी लापरवाही के ज़हरीले पानी ने कलंकित कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस “कलंक-कथा” के प्रमुख चेहरे Kailash Vijayvargiya को तुरंत इस्तीफ़ा देना चाहिए। साथ ही प्रभारी मंत्री Dr Mohan Yadav से इंदौर की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग भी की।

पटवारी ने आरोप लगाया कि पहले कांग्रेस की जांच समिति को भागीरथपुरा जाने से रोका गया और बाद में प्रदेश अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष की मशक्कत के बाद ही पीड़ितों से मुलाकात कराई गई। उन्होंने कहा, “यह साफ दर्शाता है कि सरकार सच उजागर होने से डर रही है।”

वहीं नेता प्रतिपक्ष Umang Singhar ने कहा कि पीड़ित परिवारों ने उनके सामने जो आपबीती रखी, वह प्रशासनिक संवेदनहीनता और जवाबदेही की पूरी तरह से कमी को उजागर करती है। मृतकों के परिजनों ने बताया कि दूषित पानी की शिकायतें पहले भी की गईं, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

कांग्रेस ने दो टूक कहा कि—

प्रत्येक मृतक के परिजन को 1 करोड़ रुपये का मुआवज़ा दिया जाए।

जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज हो।

आरोपी मंत्रियों से तुरंत इस्तीफ़ा लिया जाए।

भागीरथपुरा की यह त्रासदी अब केवल स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक नैतिकता का बड़ा सवाल बन चुकी है।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।