एक महीने बाद भी जस के तस भागीरथपुरा, गंदे पानी का स्रोत अब तक अज्ञात
इंदौर,24 जनवरी 2026: देश की सबसे स्वच्छ नगरी कहलाने वाले इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से जुड़ा संकट एक महीने बाद भी समाप्त होता नजर नहीं आ रहा है। अब तक इस क्षेत्र में 24 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि प्रशासन आज तक गंदे पानी के वास्तविक स्रोत की पहचान नहीं कर सका है।
23 जनवरी को 63 वर्षीय बद्रीप्रसाद की मौत के बाद मामला एक बार फिर गरमा गया। प्रशासन ने उनकी मौत का कारण टीबी बताया, जबकि परिजनों का दावा है कि बद्रीप्रसाद पूरी तरह कामकाजी और स्वस्थ थे तथा दूषित पानी पीने के बाद उन्हें उल्टी-दस्त की शिकायत हुई, जिसके बाद 8 दिन के भीतर उनकी मौत हो गई। परिजनों का तर्क है कि टीबी जैसी बीमारी इतनी कम अवधि में जानलेवा नहीं होती।
शव रखकर चक्काजाम, फूटा लोगों का गुस्सा
प्रशासनिक रवैये से नाराज परिजनों और रहवासियों ने 24 जनवरी की सुबह भागीरथपुरा पुल पर शव रखकर चक्काजाम किया। प्रदर्शन के दौरान स्थानीय पार्षद के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। रहवासियों का आरोप है कि मौत के बाद न तो कोई जनप्रतिनिधि और न ही प्रशासनिक अधिकारी पीड़ित परिवार के पास पहुंचा।
एक परिवार, दो मौतें
मामले की सबसे मार्मिक तस्वीर यह रही कि निर्धन परिवार के पास अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं थे। अस्पताल से शव मोहल्ले के लोगों ने चंदा इकट्ठा कर घर पहुंचाया। बताया गया कि पूरे एक दिन तक शव घर में रखा रहा, लेकिन कोई मदद नहीं पहुंची। परिजनों का यह भी दावा है कि एक महीने पहले बद्रीप्रसाद की बहू कंचन लिटोरिया की भी दूषित पानी से मौत हो चुकी है। इस परिवार में बद्रीप्रसाद ही एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। लगातार दो मौतों ने प्रशासनिक दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोर्ट की फटकार के बाद भी हालात जस के तस
भागीरथपुरा के दूषित जल मामले में हाईकोर्ट पहले ही शासन को कड़ी फटकार लगा चुका है, इसके बावजूद एक महीने बाद भी न तो साफ पेयजल की स्थायी व्यवस्था हो सकी है और न ही मौतों को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है। रहवासियों का आरोप है कि मौतों के आंकड़े दबाए जा रहे हैं।
प्रशासन के दावे, ज़मीन पर सवाल
प्रशासन का कहना है कि प्रभावित क्षेत्र में टैंकरों से पानी सप्लाई की जा रही है और जांच जारी है, लेकिन स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब गंदे पानी का स्रोत ही तय नहीं हुआ, तो समाधान कैसे होगा?
सवाल अब भी कायम
- आखिर स्वच्छ शहर में साफ पानी कब मिलेगा?
- एक महीने बाद भी प्रशासन के प्रयासों में तेजी क्यों नहीं दिख रही?
- क्या मौतों के आंकड़े सच में रुके हैं या दबा दिए गए हैं?
