मस्टर कर्मचारियों के नियमतिकरण और डोर टू डोर कचरा कलेक्शन कर्मचारियों के वेतन का मामला
नगर निगम को सुप्रीम कोर्ट से भी मुंह की खानी पड़ी, बावजूद नहीं किया जा रहा अदालत के आदेश का पालन
इंदौर, 09 मार्च 2026: नगर पालिका निगम, इंदौर के आयुक्त क्षितिज सिंघल को श्रम आयुक्त कार्यालय, मध्यप्रदेश ने एक साथ दो कारण बताओ सूचना पत्र जारी किए हैं। दोनों नोटिस दिनांक 02 मार्च 2026 को जारी किए गए हैं। एक मामला 1390 मस्टर कर्मचारियों के वेतनमान और दूसरा मामला 1650 डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के कर्मचारियों के स्थायीकरण का है।
मजदूर यूनियन के अध्यक्ष और अधिवक्ता ओम प्रकाश खटके ने न्यूजओ2 को बताया कि पहला नोटिस (क्रमांक 34/13/तीन/2023/5183) इंदौर मस्टर कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष की शिकायत पर जारी हुआ है, जिसमें मनोहर एवं अन्य 1390 सेवानियुक्तों को स्थायी कर्मचारियों के समान वेतनमान तथा 1391 सेवानियुक्त को 7 दिन का आकस्मिक एवं 17 दिन का सवैतनिक अर्जित अवकाश दिलाने हेतु औद्योगिक न्यायाधिकरण द्वारा 31 जनवरी 2023 को पारित अवार्ड का पालन न करने पर अभियोजन की स्वीकृति मांगी गई है।
दूसरा नोटिस (क्रमांक 56/13/तीन/2023/5185) अनिल सोनी एवं अन्य 1650 श्रमिकगण (डोर टू डोर कचरा कलेक्शन) की शिकायत पर जारी हुआ है, जिसमें दैनिक वेतन भोगी 1650 श्रमिकों को स्थायी कर्मी बनाने एवं स्थायी कर्मियों के अनुसार वेतनलाभ दिलाने हेतु 21 फरवरी 2023 को पारित अवार्ड का पालन न होने पर नोटिस दिया गया है।
श्रम आयुक्त तन्वी हुड्डा ने दोनों मामलों में आयुक्त को 17 मार्च 2026 को दोपहर 12:30 बजे तक लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 18(3) के तहत न्यायालय का निर्णय मानना बाध्यकारी है और इसका पालन न करना धारा 29 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।
गौरतलब है कि नगर निगम हाई कोर्ट और देश की सर्वोच्च अदालत में इस मामले में पहले ही हार चुका है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही 1825 दैनिक वेतनभोगी मस्टर कर्मचारियों के नियमितीकरण पर मुहर लगा चुका है, बावजूद इसके नगर निगम प्रशासन द्वारा अवार्ड का पालन नहीं किया जा रहा था, जिसके बाद श्रम आयुक्त ने सख्ती दिखाई है।
