भोपाल, 8 मई : सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कुंवर विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई विवादास्पद टिप्पणियों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि संभवतः मंत्री कर्नल कुरैशी की प्रशंसा करना चाहते थे, लेकिन अपनी बात सही ढंग से व्यक्त नहीं कर सके।

सॉलिसिटर जनरल ने हालांकि स्पष्ट किया कि वह मंत्री के बयान का बचाव नहीं कर रहे हैं और इसे “दुर्भाग्यपूर्ण” मानते हैं। उन्होंने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत दृष्टिकोण है, न कि मध्य प्रदेश सरकार का आधिकारिक पक्ष।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या मंत्री के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति पर निर्णय लेने संबंधी पूर्व आदेश का पालन किया गया है। इस पर एसजी ने बताया कि अभी तक निर्णय नहीं लिया गया है और राज्य को अतिरिक्त समय की आवश्यकता है।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 के तहत आवश्यक अभियोजन स्वीकृति पर दो माह के भीतर निर्णय लिया जाए।

विजय शाह ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मई 2025 के उस स्वतः संज्ञान आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। यह मामला उनके उस कथित बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकवादियों की बहन बताया था।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने मंत्री के आचरण पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि यह वास्तव में जुबान फिसलने का मामला होता तो मंत्री तत्काल सार्वजनिक रूप से माफी मांगते। उन्होंने कहा कि राजनीतिक व्यक्ति अपने शब्दों के प्रति सजग होते हैं।

न्यायमूर्ति बागची ने एसआईटी रिपोर्ट का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि मंत्री इस प्रकार के विवादास्पद बयान देने के अभ्यस्त प्रतीत होते हैं।

विजय शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनींदर सिंह ने कहा कि मंत्री पहले ही सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं, लेकिन पीठ ने इसे पर्याप्त और ईमानदार नहीं माना।

शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई स्थगित करते हुए राज्य सरकार को अभियोजन स्वीकृति पर शीघ्र निर्णय लेने का निर्देश दोहराया।

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