मजदूरों के हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट से जीतने के बाद भी निगम ने नहीं दिया लाभ
इंदौर, 13 मई 2026: नगर निगम इंदौर के मस्टर कर्मचारियों एवं डोर टू-डोर कचरा कलेक्शन श्रमिकों को वेतन लाभ एवं नियमितीकरण से जुड़े मामले में बुधवार को श्रमायुक्त कार्यालय में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान नगर निगम इंदौर की ओर से अपर आयुक्त उपस्थित हुए। उन्होंने श्रमायुक्त के समक्ष कहा कि निगम आगामी एक माह के भीतर कर्मचारियों को न्यायालयीन आदेशों के अनुरूप लाभ प्रदान करने की प्रक्रिया पूरी करेगा। इस पर श्रमायुक्त द्वारा निगम प्रशासन को एक माह का समय प्रदान कर दिया गया।
वहीं श्रमिकों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ओमप्रकाश खटके ने निगम को अतिरिक्त समय दिए जाने का विरोध दर्ज कराया। खटके ने न्यूज ओ2 से चर्चा में कहा कि श्रमिक लंबे समय से हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार वेतन वृद्धि का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि पहली लड़ाई सभी श्रमिकों को न्यायालय के आदेशानुसार वेतन लाभ दिलाने की है। इसके बाद वर्ष 2011 से लंबित एरियर दिलाने के लिए भी कानूनी लड़ाई जारी रखी जाएगी।
खटके ने कहा कि यदि नगर निगम पुनः अपने आश्वासन से मुकरता है तो हाई कोर्ट में अलग से याचिका दायर की जाएगी तथा सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका (Contempt of Court) भी प्रस्तुत की जाएगी।
सुनवाई के दौरान श्रमायुक्त ने श्रमिक पक्ष को आश्वस्त किया कि नगर निगम को अंतिम अवसर के रूप में एक माह का समय दिया जा रहा है। इसके बाद भी यदि मांगों पर अमल नहीं किया गया तो अभियोजन स्वीकृति की कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि इससे पहले भी नगर निगम इंदौर को 1390 मस्टर कर्मचारियों के वेतनमान तथा 1650 डोर टू डोर कचरा कलेक्शन कर्मचारियों के स्थायीकरण और वेतन लाभ मामले में श्रमायुक्त कार्यालय द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं। श्रमिक संगठनों का आरोप है कि हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद निगम प्रशासन अब तक पूर्ण पालन नहीं कर सका है।
