इंदौर में ‘भाषा की राजनीति और राजनीति की भाषा’ विषय पर बोले राज्यसभा सांसद, कहा- कई बार स्पष्टीकरण से वास्तु स्थिति नहीं बदलती

इंदौर, 17 मई 2026 : देश के मुख्य न्यायाधीश की युवाओं को लेकर की गई कथित “कॉकरोच और परजीवी” टिप्पणी पर उठे विवाद और सीजेआई के स्पष्टीकरण को संदर्भित करते हुए आरजेडी से राज्यसभा सांसद Manoj Kumar Jha ने इंदौर में कहा कि कई बार स्पष्टीकरण देने से वास्तविक स्थिति नहीं बदलती। रविवार को इंदौर में अभ्यास मण्डल की व्याख्यानमाला के दौरान “राजनीति की भाषा और भाषा की राजनीति” विषय पर संबोधित करते हुए मनोज झा ने अपने वक्तव्य की शुरुआत ही मुख्य न्यायाधीश के बयान और उसके बाद दिए गए स्पष्टीकरण पर प्रतिक्रिया से की।

उन्होंने कहा, “अंधेरे में जुगनू की रोशनी इत्मीनान देती है। आज के दौर में मैं देश के सर्वोच्च न्यायालय को जुगनू की तरह मानता था, लेकिन मुख्य न्यायाधीश के बयान से जुगनू के टिमटिमाने से जो रोशनी का सुराग मिलता था, वह भी बंद हो गया।”

झा ने कहा कि सीजेआई ने युवाओं को कॉकरोच और परजीवी नहीं कहा, बल्कि देश की आत्मा को कॉकरोच और परजीवी कहा है।हम सब जानते हैं, कि चीजें बहुत बढ़िया हाल में नहीं हैं, लेकिन संघर्ष से विकल्प उभरता है। समाज को बेहतर राजनीति नहीं करनी है, राजनीति को बेहतर समाज करना है । उन्होंने आगे कहा कि जब उन्होंने मुख्य न्यायाधीश का बयान सुना तो उस पर प्रतिक्रिया स्वरूप लगभग 950 शब्दों का एक आलेख लिखा था। उस समय उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह मुद्दा इतने व्यापक स्तर तक पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा, “अगले दिन माननीय मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्टीकरण दिया कि उनका आशय वह नहीं था जो समझा गया, लेकिन कई बार क्लेरिफिकेशन वास्तविक स्थिति को बदल नहीं पाता।”

राजनीति की भाषा पर टिप्पणी करते हुए मनोज झा ने कहा, “भाषा के मामले में जो हमाम बन गई है, उसमें सब नंगे हैं।” उन्होंने राजनीतिक संवाद की गिरती भाषा और उसके सामाजिक प्रभावों पर भी चिंता जताई।

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