इंदौर। प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट के गृह जिले इंदौर में जल संसाधनों और मास्टर प्लान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दस्तावेजों और निगम रिकॉर्ड के आधार पर दावा किया गया है कि शहर के तालाबों, जलाशयों और जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण में भारी अनियमितताएं हुई हैं, जिससे भविष्य में जल संकट और गहरा सकता है।

इंदौर के सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी ने बताया कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नगर निगम रिकॉर्ड में 27 तालाब दर्ज हैं, जिनका कुल जलग्रहण क्षेत्र लगभग 96.97 वर्ग किलोमीटर बताया गया है। वहीं तालाब क्षेत्र केवल 7.29 वर्ग किलोमीटर दर्ज है। आरोप है कि मास्टर प्लान में जलाशयों, नदी-नालों और जल क्षेत्रों के लिए निर्धारित 32.61 प्रतिशत भूमि उपयोग को वास्तविक रूप से सुरक्षित नहीं रखा गया।

श्री कोडवानी के अनुसार वर्ष 2021 के मास्टर प्लान में 505 वर्ग किलोमीटर निवेश क्षेत्र प्रस्तावित था, जिसमें 164.78 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र जलाशय, नदी और नालों के लिए आरक्षित माना गया था। इसके बावजूद नगर निगम अपनी सीमा 277 वर्ग किलोमीटर दर्शा रहा है। सवाल यह भी उठाया गया है कि जब मास्टर प्लान के अनुसार 35 लाख की आबादी के लिए विस्तृत क्षेत्र तय था, तब सीमित क्षेत्र में लगातार बढ़ती आबादी का दबाव कैसे बढ़ने दिया गया।

उन्होंने एक रिपोर्ट जारी कर दावा किया कि, वर्ष 2020 तक शहर के कई वार्डों में जनसंख्या घनत्व तय मानकों से कहीं अधिक पहुंच चुका था। छह वार्डों में आबादी एक लाख से अधिक और 14 वार्डों में 50 हजार से अधिक बताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पानी, सीवरेज, ट्रैफिक और अन्य बुनियादी सेवाओं पर दबाव बढ़ा है।

दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि जिले के कुल 3898 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में लगभग 45 लाख आबादी निवास करती है, जबकि नगर निगम सीमा में ही 35 लाख लोग केंद्रित हैं। इसके चलते जल संरक्षण क्षेत्रों पर अतिक्रमण और भूमि उपयोग परिवर्तन के आरोप लगाए जा रहे हैं।

तालाबों की सूची में बिलावली बड़ा, लिम्बोदी, सिरपुर बड़ा, सिरपुर छोटा, तिगरिया बादशाह और कनाड़िया सहित 27 प्रमुख जलाशयों का उल्लेख किया गया है। इनमें कई तालाबों के जलग्रहण क्षेत्र बड़े पैमाने पर दर्ज हैं, लेकिन संरक्षण और रिकॉर्ड संधारण को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

शहरी विकास और जल प्रबंधन से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि जलग्रहण क्षेत्रों और प्राकृतिक जल संरचनाओं का संरक्षण नहीं किया गया तो इंदौर को आने वाले वर्षों में गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। वहीं इस मुद्दे पर नगर निगम और संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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