मक्सी पहुंचे निर्यापक मुनि सुधा सागर; इंदौर में चातुर्मास को लेकर बढ़ी सरगर्मी, दो सामाजिक संसदों के बीच एकता का सवाल भी चर्चा में , समाज की एकता पर भी टिकी निगाहें
इंदौर, 17 जुलाई 2026। निर्यापक मुनि पुंगव 108 सुधा सागर महाराज का विहार इन दिनों इंदौर की दिशा में जारी है। 17 जुलाई को महाराज श्री मक्सी पहुंचे, जिसके बाद इंदौर के दिगंबर जैन समाज में उनके संभावित चातुर्मास को लेकर उत्साह और चर्चाएं तेज हो गई हैं। यद्यपि दिगंबर मुनि अनियत बिहारी होते हैं और उनके अगले पड़ाव अथवा चातुर्मास स्थल को लेकर अंतिम निर्णय स्वयं उनकी साधना एवं परिस्थितियों पर निर्भर करता है, फिर भी श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि वर्ष 2026 के चातुर्मास का सौभाग्य इंदौर को प्राप्त हो सकता है।
इसी संभावना को लेकर इंदौर के विभिन्न सामाजिक और धार्मिक पदाधिकारी लगातार महाराज श्री के दर्शन कर श्रीफल अर्पित कर रहे हैं तथा उन्हें इंदौर पधारने का आग्रह कर रहे हैं। निर्वाचित अध्यक्ष आनंद गोधा ने भी सुधा सागर महाराज को श्रीफल अर्पित कर इंदौर आने का निवेदन किया।
वहीं दूसरी ओर मनोनीत अध्यक्ष विनय बाकलीवाल भी अपनी टीम के साथ महाराज श्री के समक्ष पहुंचकर श्रीफल अर्पित कर चुके हैं।
गौरतलब है कि इंदौर में समाज के अध्यक्षीय चुनाव के बाद वर्तमान में दो सामाजिक संसदें सक्रिय हैं। दोनों ही पक्ष अलग-अलग बैठकों का आयोजन कर रहे हैं और संभावित चातुर्मास की तैयारियों में जुटे हुए हैं। साथ ही दोनों समूह महाराज श्री के विहार में भी सहभागिता कर रहे हैं।

संलग्न चित्र- मनोनीत अध्यक्ष विनय बाकलीवाल के नेतृत्व में आयोजित बैठक
इस बीच चातुर्मास को लेकर समाज में दावों का दौर भी शुरू हो गया है।
प्रचार प्रमुख सतीश जैन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि 15 जुलाई को जाल सभागृह में आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया कि यदि चातुर्मास इंदौर में होता है तो उसका आयोजन “सकल दिगंबर जैन समाज” के बैनर तले किया जाएगा। बैठक में विभिन्न मंदिर समितियों, सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं, महिला मंडलों और युवा संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा सामूहिक रूप से आयोजन की तैयारी का संकल्प लिया।
वहीं दूसरी ओर 15 जुलाई को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया कि राष्ट्रसंत सुधा सागर महाराज का वर्ष 2026 का ऐतिहासिक वर्षायोग चातुर्मास इंदौर में सुनिश्चित हो गया है। मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू द्वारा जारी विज्ञप्ति में इसे इंदौर के लिए गौरव और धर्मलाभ का अवसर बताया गया तथा 16 जुलाई को मोदी जी की नसिया में धर्मसभा आयोजित कर विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों को तैयारियों के लिए आमंत्रित किया गया। विज्ञप्ति में कार्यकारी अध्यक्ष नवीन गोधा सहित अन्य पदाधिकारियों के नाम भी प्रकाशित किए गए।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, सुधा सागर महाराज ने कुछ पदाधिकारियों को इस बात पर नाराजगी भी जताई कि किसी मंच या संगठन के बैनर तले चातुर्मास की घोषणा अथवा प्रस्तावित आयोजन की बात कैसे की जा रही है, जबकि दिगंबर मुनि अनियत बिहारी होते हैं और चातुर्मास को लेकर अंतिम निर्णय की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
समाज के वरिष्ठजनों का मानना है कि वर्तमान में सक्रिय दोनों सामाजिक संसदें यदि एक मंच पर आती हैं तो यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी ऐतिहासिक साबित हो सकता है।
अब इंदौर के जैन समाजजनों की निगाहें सुधा सागर महाराज के अगले निर्णय पर टिकी हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या महाराज श्री वास्तव में इंदौर को अपने चातुर्मास स्थल के रूप में चुनेंगे? यदि ऐसा होता है तो क्या उनके सान्निध्य में समाज की दोनों संसदें एक मंच पर आ सकेंगी? उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व प्रमाण सागर महाराज भी अपने इंदौर चातुर्मास के दौरान समाज में समन्वय स्थापित करने का प्रयास कर चुके हैं।
ऐसे में संभावित चातुर्मास केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि इंदौर के दिगंबर जैन समाज की एकता, नेतृत्व और सामूहिकता की भी परीक्षा माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि “जागे भाग्य इंदौर के” का दावा वास्तविकता में बदलता है या नहीं, और क्या इस अवसर पर समाज अपनी आंतरिक दूरियों को समाप्त कर एकजुट हो पाता है।
