बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भेजा गया विस्तृत रिप्रेजेंटेशन
इंदौर, 02 दिसंबर 2025: ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE-20), जो 30 नवंबर 2025 को आयोजित हुई थी, उसकी असामान्य कठिनाई को लेकर अभ्यर्थियों और अधिवक्ता समुदाय में गहरी चिंता प्रकट की गई है। छात्रों की समस्याओं को देखते हुए डॉ. पंकज वाधवानी, हाईकोर्ट एडवोकेट एवं विधि विशेषज्ञ, ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को एक विस्तृत रिप्रेजेंटेशन ईमेल के माध्यम से भेजा है, जिसमें परिणाम में 5 प्रतिशत रिलैक्सेशन देने का अनुरोध किया गया है।
डॉ. वाधवानी ने बताया कि विद्यार्थियों से प्राप्त फीडबैक और परीक्षा विश्लेषण के आधार पर यह स्पष्ट है कि इस बार का प्रश्नपत्र पिछले वर्षों की तुलना में काफी कठिन था। कई प्रश्न इतने लंबे और जटिल थे कि उन्हें केवल पढ़ने में ही समय का बड़ा हिस्सा निकल गया, जिसके कारण अनेक अभ्यर्थी पूरा पेपर हल नहीं कर सके।
रिप्रेजेंटेशन में उठाए गए मुख्य मुद्दे:
AIBE-20 का स्तर पूर्व परीक्षाओं की तुलना में असाधारण रूप से कठिन रहा।
प्रश्नपत्र के कई सवाल अत्यधिक विस्तृत और समय लेने वाले थे।
दूसरी व तीसरी बार परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी भी पासिंग मार्क्स के बॉर्डर पर अटक रहे हैं।
कठिन परीक्षा के चलते छात्रों में तनाव, निराशा और मानसिक दबाव बढ़ गया है।
एलएलबी के बाद करियर, नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच बार परीक्षा बार-बार न निकलने से अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
डॉ. वाधवानी ने कहा कि देश की कई राष्ट्रीय परीक्षाओं में, यदि प्रश्नपत्र अपेक्षित स्तर से अधिक कठिन हो, तो परीक्षार्थियों के हित में मॉडरेशन या उचित रियायत देना एक सामान्य प्रक्रिया है। इसी आधार पर AIBE-20 में भी 5 प्रतिशत रिलैक्सेशन देने की मांग की गई है, ताकि deserving candidates का करियर प्रभावित न हो।
अभ्यर्थियों और अधिवक्ताओं ने उम्मीद जताई है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया इस गंभीर मुद्दे पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए छात्रों के हित में उचित निर्णय लेगी।
डॉ. पंकज वाधवानी (हाईकोर्ट एडवोकेट)
मो.: 9827396423
