संघ की शताब्दी गोष्ठी में होसबाले का उद्बोधन: हिन्दुत्व एक संस्कृति, अनेक अभिव्यक्तियाँ
इंदौर | 30 नवंबर 2025, रविवार: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि हिन्दुत्व भारत की पहचान है और यह मानव धर्म की ऐसी अवधारणा है, जो सृष्टि में एकत्व और कृतज्ञता के भाव पर आधारित है। उन्होंने बताया कि हिन्दू एक भू-सांस्कृतिक अवधारणा है, जो संवेदना, कर्तव्य, गुण, जीवन-शैली और उपासना पद्धति से निर्मित होती है। वे इंदौर के रविन्द्र नाट्यगृह में संघ स्थापना के शताब्दी वर्ष पर आयोजित प्रमुख नागरिक गोष्ठी में बोल रहे थे। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों — उद्योग, चिकित्सा, विज्ञान, साहित्य, मीडिया, शिक्षा, प्रशासन, न्यायिक सेवा, खेल और सामाजिक संगठनों से जुड़े 750 से अधिक लोग उपस्थित थे।
संघ की सौ वर्षीय यात्रा पर चर्चा
गोष्ठी के प्रथम सत्र में “संघ यात्रा के सौ वर्ष” विषय पर बोलते हुए होसबाले ने संघ स्थापना की पृष्ठभूमि और उद्देश्य रखे। उन्होंने कहा कि संगठन के अभाव, आचरण में धर्म से विमुखता, पराधीनता के दौरान सांस्कृतिक आत्महीनता और स्वार्थ की प्रवृत्तियों ने समाज को कमजोर किया। इसी स्थिति को बदलने के उद्देश्य से डॉ. हेडगेवार ने संघ की स्थापना की और शाखा पद्धति विकसित की।
उन्होंने कहा कि संघ कार्यकर्ता आपदाओं और आपातकाल जैसे कठिन समय में अग्रिम पंक्ति में रहे। लोकतंत्र की पुनर्स्थापना, रामजन्मभूमि आंदोलन, स्वदेशी जागरण सहित अनेक सामाजिक-सांस्कृतिक अभियानों में सक्रिय भूमिका रही।
एकल विद्यालय और एक लाख से अधिक सेवा-परियोजनाओं सहित, 1995 के बाद ग्राम-विकास, गौसेवा, सामाजिक समरसता, परिवार-प्रबोधन और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में भी कार्य किया गया। विवेकानंद शिला-स्मारक तथा राम मंदिर आंदोलन में भी संघ की सहभागिता का उल्लेख किया गया।
“हिन्दुत्व एक संस्कृति, अनेक अभिव्यक्तियाँ”
द्वितीय सत्र में हिन्दुत्व विषय पर बोलते हुए होसबाले ने कहा कि हिन्दुत्व का मार्ग “भी” का मार्ग है — ईश्वर इस तरीके से भी प्राप्त हो सकता है और दूसरे तरीके से भी। विविध उपासना-पद्धतियों और परंपराओं के बावजूद भारतीय संस्कृति का मूल एक है। उन्होंने कहा कि आचरण की एकता, वचनों की दृढ़ता और संबंधों की संस्कृति पूरे भारत में समान रूप से दिखाई देती है।
प्रश्नोत्तर में कंवर्जन, युवाओं, नशे और तकनीक पर चर्चा
अंतिम सत्र में होसबाले ने श्रोताओं के प्रश्नों के उत्तर दिए। प्रमुख बातें इस प्रकार रहीं:
कंवर्जन पर रोक – उन्होंने कहा कि धर्म-जागरण, सेवा कार्य, सामाजिक समरसता, संतों के प्रवास और क़ानून के कठोर पालन से कंवर्जन रोकने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि हिंदू समाज समावेशी है और “कन्वर्जन” नहीं करता।
पश्चिमीकरण – जो जीवन और विकास के हित में हो, उसे अपनाया जाना चाहिए।
युवा और नशा – परिवारों में संस्कार, समाज में उदाहरण और कठोर क़ानून के जरिए नशे की समस्या पर नियंत्रण संभव है। मोबाइल-लत पर जनजागरण की आवश्यकता बताई।
धर्म और पंथ का अंतर – उनका कहना था कि रिलीजन बदल सकता है, धर्म नहीं। गलत इरादों से किए जा रहे रिलीजन परिवर्तन को रोकना जरूरी है।
सेकुलरिज़्म पर चर्चा – उन्होंने कहा कि सेकुलरिज़्म की गलत समझ के चलते लोग स्वयं को हिन्दू कहने से झिझकने लगे हैं, इसलिए हिन्दुत्व के विषय को नई पीढ़ी तक ले जाना जरूरी है।
उन्होंने आगे कहा कि नई पीढ़ी अध्ययन और शोध के माध्यम से हिन्दुत्व को समझने में रुचि ले रही है और यही पीढ़ी भारत की सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ाएगी।
मंच पर प्रांत संघचालक प्रकाश शास्त्री और इंदौर विभाग संघचालक मुकेश मोढ उपस्थित थे।
