नई दिल्ली, बिना शराब का सेवन किए भी शरीर में अल्कोहल बनने की एक दुर्लभ चिकित्सीय स्थिति सामने आई है, जिसे ऑटो-ब्रुअरी सिंड्रोम (Auto-Brewery Syndrome) या गट फर्मेंटेशन सिंड्रोम कहा जाता है।

चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति में आंत में मौजूद कुछ प्रकार के यीस्ट और बैक्टीरिया भोजन में मौजूद कार्बोहाइड्रेट को किण्वन प्रक्रिया के माध्यम से एथेनॉल (अल्कोहल) में परिवर्तित कर देते हैं। इसके कारण व्यक्ति के रक्त में अल्कोहल का स्तर बढ़ जाता है और उसे नशे जैसे लक्षण महसूस होते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या आमतौर पर कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन जैसे रोटी, चावल, ब्रेड और मिठाइयों के अधिक सेवन के बाद बढ़ जाती है।

इस स्थिति के लक्षणों में चक्कर आना, बोलने में लड़खड़ाहट, असंतुलन, थकान और भ्रम शामिल हैं। कई मामलों में मरीज के रक्त परीक्षण में अल्कोहल की उपस्थिति भी पाई गई है, जबकि उसने शराब का सेवन नहीं किया होता।

चिकित्सकों के अनुसार, यह स्थिति आंत में यीस्ट की अधिक वृद्धि, लंबे समय तक एंटीबायोटिक के उपयोग, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली या पाचन तंत्र की समस्याओं के कारण उत्पन्न हो सकती है।

हालांकि यह बीमारी दुर्लभ है, लेकिन इसका उपचार संभव है। उपचार में एंटीफंगल दवाएं, कम कार्बोहाइड्रेट वाला आहार, प्रोबायोटिक्स और जीवनशैली में बदलाव शामिल हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि इस बीमारी के प्रति जागरूकता आवश्यक है, क्योंकि इसके कारण मरीज को सामाजिक और कानूनी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।