नई दिल्ली: कांग्रेस नेता Gurdeep Singh Sappal ने अमेरिका–इज़राइल–ईरान संघर्ष पर भारत की प्रतिक्रिया को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि ईरान के मुद्दे पर भारत की “खामोशी” को जिम्मेदार कूटनीति के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि यह वास्तव में रणनीतिक झुकाव का संकेत है।
सप्पल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि खामोशी तभी सिद्धांत आधारित संयम मानी जा सकती है जब उसे स्पष्ट रूप से संप्रेषित किया जाए, लेकिन भारत ने वॉशिंगटन और तेल अवीव के प्रति अस्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत ने ईरान के सर्वोच्च नेता के निधन पर शोक संदेश तक जारी नहीं किया।
उन्होंने कहा कि ईरान केवल व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि भारत की महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजनाओं—इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) और चाबहार पोर्ट—का प्रमुख आधार है, जिन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।
सप्पल के अनुसार, भारत इस समय BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और ईरान भी इसका सदस्य है, ऐसे में बहुध्रुवीय व्यवस्था की बात करते हुए एकध्रुवीय प्रभाव में व्यवहार करना विरोधाभासी है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने अमेरिका के इस आकलन पर भरोसा किया कि ईरान जल्द कमजोर हो जाएगा, जो गलत साबित हुआ और इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।
सप्पल ने कहा कि संतुलित कूटनीति के तहत भारत को चाबहार परियोजना की सुरक्षा, संतुलित रुख और युद्धविराम की मांग करनी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय “झुकाव से उपजी खामोशी” अपनाई गई।
