इंदौर–भोपाल जल आपूर्ति संकट पर जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया का सर्वे
इंदौर/भोपाल, 16 जनवरी 2026: इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई गंभीर त्रासदी के बाद जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने इंदौर और भोपाल में जल आपूर्ति की वास्तविक स्थिति को लेकर एक नागरिक सर्वेक्षण किया है। सर्वे रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दोनों प्रमुख शहरों में अधिकांश नागरिकों को आज भी 24×7 सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं है।
जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया द्वारा इंदौर नगर निगम के 13 ज़ोन और 18 वार्डों के 34 शहरी इलाकों में 208 निवासियों को सर्वे में शामिल किया गया। वहीं भोपाल में 53 लोगों से जानकारी ली गई, जिनमें 11 व्यक्तिगत साक्षात्कार और 42 लोग फोकस ग्रुप डिस्कशन का हिस्सा रहे। यह सर्वे अमूल्य निधि, रेहमत मंसूरी और सुधा तिवारी द्वारा तैयार किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, इंदौर में लगभग 89 प्रतिशत नागरिकों को 24×7 जल प्रदाय नहीं हो रहा है। भोपाल में भी हालात लगभग समान पाए गए। सर्वे में शामिल करीब 60 प्रतिशत लोगों ने सप्लाई किए जा रहे पानी की गुणवत्ता पर संदेह जताया और उसे पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना। भोपाल में भी अधिकांश प्रतिभागियों की यही राय सामने आई।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि इंदौर में लगभग 40 प्रतिशत लोगों ने उल्टी-दस्त, टाइफाइड और पीलिया जैसी जलजनित बीमारियों से प्रभावित होने की बात स्वीकार की। उल्लेखनीय है कि भागीरथपुरा जल संकट के कारण अब तक 24 लोगों की मृत्यु हो चुकी है और 400 से अधिक लोग बीमार बताए जा रहे हैं।
जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2004 में एशियन डेवलपमेंट बैंक से 1365 करोड़ रुपये का कर्ज 24×7 जल प्रदाय के लिए लिया गया था। इसके अलावा 2015 से 2025 के बीच अमृत 1.0 और 2.0 योजनाओं के तहत करीब 3000 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके बावजूद नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
अभियान के अमूल्य निधि ने जल प्रदाय में निजीकरण (PPP मॉडल) की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे जल व्यवस्था और कमजोर हुई है तथा जन स्वास्थ्य की अनदेखी हुई है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित पेयजल केवल सेवा नहीं, बल्कि नागरिकों का मौलिक अधिकार और गंभीर जन स्वास्थ्य का मुद्दा है, जिसे प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
रेहमत मंसूरी, सुधा तिवारी, डॉ. जी.डी. वर्मा, राहुल यादव और साजीदा खान ने बताया कि यह एक प्रारंभिक सर्वे है, जिसकी रिपोर्ट उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार को भेज दी गई है। अभियान का मानना है कि इंदौर और भोपाल जैसे प्रदेश के प्रमुख शहरों में जल प्रदाय की वास्तविक स्थिति जानने के लिए नगर निगम स्तर पर व्यापक सर्वेक्षण कराया जाना चाहिए।
जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया की प्रमुख मांगें:
भागीरथपुरा जल संकट की स्वतंत्र जांच कर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया जाए।
सभी नागरिकों को 24×7 पर्याप्त दबाव के साथ सुरक्षित पेयजल तुरंत उपलब्ध कराया जाए।
भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
जलजनित बीमारियों से पीड़ित सभी लोगों को निःशुल्क इलाज प्रदान किया जाए।
पानी की मात्रा और गुणवत्ता CPHEEO O&M मैनुअल के मानकों के अनुरूप हो।
जल आपूर्ति और सैनिटेशन सिस्टम का स्वतंत्र थर्ड-पार्टी ऑडिट कराया जाए।
दूषित पानी से हुई मौतों के लिए प्रति मृतक 1 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए।
अमृत योजना के तहत हुए 3000 करोड़ रुपये के खर्च और एडीबी से लिए गए 1365 करोड़ रुपये के कर्ज की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
