मुआवजा, ई-कॉमर्स प्रतिबंध और ट्रांसपोर्ट एजेंसियों पर कार्रवाई के आदेश
इंदौर, 16 जनवरी 2026: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने चाइनीज नायलॉन मांझे (सिंथेटिक मंजा) के कारण हो रही मौतों और गंभीर दुर्घटनाओं को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज जनहित याचिका में राज्य सरकार को व्यापक और ठोस नीति बनाने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की युगल खंडपीठ ने कहा कि मकर संक्रांति से पहले सख्त आदेश जारी किए जाने के बावजूद प्रदेश में लगातार हादसे सामने आना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
हाई कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान
हाई कोर्ट ने इंदौर के एक स्थानीय समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के आधार पर इस मामले में सुओ मोटो जनहित याचिका दर्ज की थी। अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझे की अवैध बिक्री और उपयोग जारी है, जिससे आम नागरिकों, दोपहिया वाहन चालकों और पक्षियों की जान खतरे में पड़ रही है।
हाई कोर्ट ने 6 बिन्दुओं पर राज्य को अहम निर्देश जारी किए हैं।
मुआवजा नीति तैयार करने के आदेश
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि नायलॉन मांझे से घायल व्यक्तियों और मृतकों के परिजनों के लिए अलग से मुआवजा नीति बनाई जाए।
जब्त मांझे का सुरक्षित निपटान
अदालत ने कहा कि जब्त नायलॉन मांझा न तो पुलिस मालखानों में लंबे समय तक रखा जाए और न ही खुले में जलाया जाए। इसे खतरनाक प्लास्टिक कचरा मानते हुए अधिकृत रिसाइक्लिंग प्लांट या औद्योगिक इंसीनरेटर में नष्ट किया जाए।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर पूर्ण रोक
Amazon, Flipkart और IndiaMART जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को निर्देश देने की बात कही गई है कि वे मध्य प्रदेश में नायलॉन मांझे की ऑनलाइन बिक्री और डिलीवरी पूरी तरह बंद करें।
मुखबिर इनाम योजना लागू करने का सुझाव
कोर्ट ने चाइनीज मांझे के निर्माण, भंडारण, बिक्री या उपयोग की जानकारी देने वाले नागरिकों के लिए गुप्त इनाम योजना शुरू करने का सुझाव दिया है।
ट्रांसपोर्ट एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई
अंतरराज्यीय स्तर पर चाइनीज मांझे की सप्लाई करने वाले ट्रांसपोर्टर और कूरियर एजेंसियों के लाइसेंस निलंबित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
हर साल पहले से तैयारी के आदेश
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मकर संक्रांति से ठीक पहले की जाने वाली औपचारिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। प्रशासन को हर साल पहले से—प्रतिबंध का कड़ाई से पालन, बाजार में सतत निगरानी और प्रिंट और सोशल मीडिया के माध्यम से जन-जागरूकता अभियान चलाने होंगे।
मामले में एमिकस क्यूरी के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक शरण, उनके साथ अधिवक्ता आकाश शर्मा ने अदालत के समक्ष विभिन्न उच्च न्यायालयों और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेशों का हवाला देते हुए चाइनीज नायलॉन मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता बताई। राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता सुदीप भार्गव ने पक्ष रखा और बताया कि कोर्ट के पूर्व आदेशों के पालन में प्रशासन द्वारा कार्रवाई की गई है। वहीं, प्रस्तावित हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रश्मेंद्र सूर्यवंशी एवं अधिवक्ता धर्मेंद्र गुर्जर ने भी अदालत में पक्ष रखते हुए इसे गंभीर जनहित का विषय बताया।
