धुरंधर 2: रिकॉर्ड कमाई के बीच हिंसा और प्रोपेगेंडा पर सवाल

बीबीसी हिंदी के हवाले से: ‘धुरंधर: द रिवेंज’

नई दिल्ली/मुंबई,
BBC Hindi के हवाले से आई समीक्षा के अनुसार, फिल्म धुरंधर: द रिवेंज (धुरंधर 2) ने जहां बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्डतोड़ कमाई कर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को नई ऊर्जा दी है, वहीं इसकी कहानी, हिंसा और वैचारिक प्रस्तुति को लेकर देश-विदेश में तीखी बहस छिड़ गई है।

फिल्म को एक ओर दर्शकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स और ब्लॉकबस्टर का दर्जा मिल रहा है, तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय मीडिया और समीक्षक इसे अत्यधिक हिंसक, राजनीतिक रूप से प्रेरित और विभाजनकारी कंटेंट के रूप में देख रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया की आलोचना

अमेरिकी अख़बार The New York Times में प्रकाशित समीक्षा में आलोचक Nicholas Rapold ने फिल्म की हिंसा को “सुन्न कर देने वाली” बताते हुए लिखा कि यह सीक्वल रणनीति से ज्यादा बदले की हिंसक श्रृंखला बनकर रह गया है। समीक्षा के मुताबिक फिल्म में दिखाया गया रक्तपात दर्शकों को हिंसा के प्रति संवेदनहीन बना सकता है।

इसी तरह ऑनलाइन पोर्टल IGN में समीक्षक Siddhant Adlakha ने इसे “नग्न राजनीतिक प्रोपेगेंडा” और “इस्लामोफोबिक” करार देते हुए तकनीकी खामियों और कमजोर संपादन पर भी सवाल उठाए हैं।

ब्रिटेन स्थित शिक्षाविद Sunny Singh के मुताबिक फिल्म 1980 के दशक की अति-पौरुषवादी हिंसक फिल्मों की याद दिलाती है, जिसमें अब ‘अति-राष्ट्रवाद’ का नया तत्व जुड़ गया है।

खाड़ी और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं

यूएई के Gulf News में प्रकाशित समीक्षा में फिल्म के कथानक को “बनावटी” बताते हुए कहा गया कि वास्तविक घटनाओं को जोड़ने का प्रयास प्रभावी नहीं लगता और कई दृश्य राजनीतिक संदर्भों के कारण अतिरंजित प्रतीत होते हैं।

वहीं अमेरिकी पोर्टल Movies We Texted About और Culture Mix जैसी साइट्स ने फिल्म को “मानसिक रूप से विचलित करने वाला” और “विषैला राष्ट्रवाद” दर्शाने वाला बताया है, हालांकि सिनेमैटोग्राफी की आंशिक सराहना भी की गई है।

कमाई में रिकॉर्ड, रिलीज़ में विस्तार

आलोचनाओं के बावजूद फिल्म ने विदेशी बाजारों में (खाड़ी देशों को छोड़कर) भारतीय फिल्मों के लिए सबसे बड़ी ओपनिंग दर्ज की है। लगभग 2200 सिनेमाघरों और 3000 स्क्रीन पर रिलीज़ के साथ यह अब तक की सबसे व्यापक अंतरराष्ट्रीय रिलीज़ मानी जा रही है।

ब्रिटेन, यूरोप और अमेरिका में फिल्म की अप्रत्याशित सफलता ने यह साफ किया है कि दर्शकों के बीच इसकी लोकप्रियता मजबूत बनी हुई है।

बहस का केंद्र: मनोरंजन बनाम प्रोपेगेंडा

विशेषज्ञों का मानना है कि फिल्म तकनीकी रूप से मजबूत एक्शन थ्रिलर जरूर है, लेकिन इसमें ‘हाइपर-माचो’ हिंसा, सैन्यवादी सोच और राष्ट्रवादी नैरेटिव का मिश्रण इसे महज मनोरंजन से आगे ले जाता है।

समीक्षाओं के मुताबिक, धुरंधर: द रिवेंज मनोरंजन और प्रोपेगेंडा के बीच की धुंधली होती रेखा को और गहरा करती है—जहां एक ओर दर्शकों का उत्साह है, वहीं दूसरी ओर इसके सामाजिक और राजनीतिक प्रभावों पर गंभीर सवाल भी उठ रहे हैं।