1 फरवरी की आम सभा में तय होगा दिगंबर जैन सामाजिक संसद का भविष्य

अध्यक्ष का चयन संविधान और लोकतांत्रिक परंपरा से ही हो—समाज की सामूहिक भावना

इंदौर। दिगंबर जैन सामाजिक संसद, इंदौर के अध्यक्ष पद के निर्वाचन हेतु 1 फरवरी को महावीर बाग में समाज जन की बैठक आयोजित की गई है। दरअसल दिगंबर जैन सामाजिक संसद के इंदौर में दो धडे हैं। बीते साल प्रमाण सागर महाराज दोनों धड़ों को एक होने का आदेश दे गए थे, जिसके बाद एक समन्वय समिति का गठन हुआ था, इस समिति का उद्देश्य दोनों धड़ों को एक करना था।

राजेश जैन दददु ने आरोप लगाते हुए बताया कि समन्वय समिति ने अपनी सम्मति से विनय बाकलीवाल को अध्यक्ष घोषित कर दिया है। जबकि समाजजनों का स्पष्ट मत है कि अध्यक्ष का चयन सदैव की भांति गरिमापूर्ण, लोकतांत्रिक और संविधानसम्मत प्रक्रिया के माध्यम से ही होना चाहिए, न कि आपसी सहमति या सीमित समिति के निर्णय से। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए दिगंबर जैन सामाजिक संसद की साधारण सभा 1 फरवरी 2026, रविवार को दोपहर 2 बजे महावीर बाग, एयरपोर्ट रोड, इंदौर में आयोजित की जाएगी, जिसमें लगभग 500 से अधिक समाजजनों के शामिल होने की संभावना है।

धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि दिगंबर जैन समाज में संविधान, संयम और समन्वय केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि आचरण का आधार हैं। ऐसे में नियमों से हटकर समन्वयक समिति द्वारा अध्यक्ष तय करने की प्रक्रिया को समाज ने अस्वीकार्य बताया है। समाज के वरिष्ठजनों का कहना है कि प्रत्येक तीन वर्ष में अध्यक्ष का निर्वाचन मंदिरों के अध्यक्षों, मंत्रियों एवं प्रतिनिधियों द्वारा मतदान के माध्यम से होता रहा है। सुशील पांड्या ने इसे समाज की परंपरा के विरुद्ध बताया, जबकि सुभाष सेठिया ने कहा कि लोकतांत्रिक निर्वाचन ही सामाजिक एकता का आधार है।

प्रिंस पाल टोंग्या के अनुसार, अनेक मंदिरों के प्रतिनिधि स्वयं को उपेक्षित और ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। वहीं अमित कासलीवाल एवं डॉ. जैनेन्द्र जैन ने स्पष्ट कहा कि समाज में एक स्वर में यह भावना उभरकर आई है कि संविधान सर्वोपरि है। भले ही वह पंजीकृत न हो, परंतु समाज की उसमें गहरी आस्था रही है। दिगंबर जैन सामाजिक संसद का एक स्वर्णिम इतिहास रहा है। पूर्व में देवकुमारसिंह कासलीवाल, पद्मश्री बाबूलाल पाटोदी, हीरालाल झांझरी, कैलाश वेद एवं प्रदीपकुमार सिंह कासलीवाल जैसे अध्यक्षों ने निर्वाचन प्रक्रिया का पालन करते हुए पद की गरिमा को बनाए रखा। धार्मिक दृष्टि से जैन परंपरा में अहिंसा, सत्य और न्याय के आधार पर निर्णय लेने की शिक्षा दी गई है। इसी भावना के अनुरूप समाज आज आत्मचिंतन और जागरूकता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

एम. के. जैन, राजेंद्र सोनी, दिलीप पाटनी, प्रदीप चौधरी, डी. के. जैन (डीएसपी), बाहुबली पांड्या, कीर्ति पांड्या, होलास सोनी, नवीन गोधा, कुशलराज जैन, प्रतिपाल टोंग्या, सुभाष सेठिया, राजेश पंड्या, आशीष जैन सूतवाले, बाहुबली जैन कुमेडी, राजीव जैन पार्षद, संजय जैन अहिंसा, विनोद जैन, अजयपाल टोंग्या, राजेश टोंग्या, राकेश विनायका, मनोहर झांझरी, धर्मेंद्र पाटनी, विपुल बाँझल, भूपेंद्र जैन, राजेश जैन (महालक्ष्मी नगर), राजकुमार जैन (सुखशांति नगर), रितेश पाटनी, विमल चौधरी, संजय मैगनस सहित अनेक समाजसेवियों ने समाजजनों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर एकता, जागरूकता और धार्मिक मर्यादा का परिचय देने की अपील की है।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।