अहंकार से मुक्ति और जिम्मेदारी का बोध कराती है मां नर्मदा
इंदौर, 31 जनवरी 2026: नर्मदा साहित्य मंथन के दूसरे दिन शनिवार को नर्मदा नदी, साहित्य, सिनेमा और वैश्विक परिदृश्य में भारत की चुनौतियों पर गहन मंथन हुआ। विश्व संवाद केंद्र, मालवा एवं देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस पंचम साहित्य मंथन में देशभर से आए विद्वानों, लेखकों और विचारकों ने विचार रखे।
प्रथम सत्र ‘नर्मदा, तुम बहती रहो’ में मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री एवं नर्मदा परिक्रमावासी प्रहलाद पटेल ने कहा कि नर्मदा का जल अमृत है, इसके संरक्षण की जिम्मेदारी समाज की है। नर्मदा से हमने सदैव लिया है, अब उसे लौटाने का समय है।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई ने नर्मदा को श्रद्धा, संस्कृति और आत्मा का विषय बताते हुए कहा कि नदियों के संरक्षण को लेकर आज आत्ममंथन की आवश्यकता है। पत्रकार एवं परिक्रमावासी ओम द्विवेदी ने नर्मदा को आस्था और साधना से जुड़ा बताते हुए कहा कि इसे तर्क से नहीं, भाव से समझा जा सकता है।
द्वितीय सत्र ‘दृष्टि ही दृष्टांतः गाजा से कश्मीर’ में लेखक अनुपम मिश्र ने कहा कि आज नैरेटिव ही धारणा बनाता है। भारत में वैचारिक बंटवारे को समझने और तथ्यों के आधार पर सोच विकसित करने की जरूरत है।
तृतीय सत्र में ‘भारत का सिनेमा’ विषय पर श्रीमती स्वाति गोयल शर्मा ने बॉलीवुड पर भारत और हिन्दू धर्म की छवि को विकृत करने के आरोप लगाए।
चतुर्थ सत्र में जियो-पॉलिटिकल एनालिस्ट आदि अंचित ने कहा कि आत्मनिर्भर विकास मॉडल ही भारत की वैश्विक ताकत है और सांस्कृतिक चेतना भारत की मूल शक्ति है।
