धार्मिक उन्माद, कट्टरता फैलाने के लगे थे आरोप, सुप्रीम कोर्ट से खारिज हुई थी एफआईआर

इंदौर, 18 दिसंबर 2025: इंदौर के शासकीय नवीन विधि महाविद्यालय से जुड़े एक बहुचर्चित मामले में करीब तीन वर्ष बाद बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। वर्ष 2022 में छात्र नेता की शिकायत के बाद निलंबित किए गए तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य डॉ. इनामुर रहमान के विरुद्ध लगाए गए सभी आरोप विभागीय जांच में प्रमाणित नहीं हो सके। इसके बाद मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने विभागीय जांच समाप्त करते हुए उन्हें निलंबन अवधि में वेतन भत्तों का लाभ दिया जाएगा।

मामला 1 दिसंबर 2022 का है, जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े छात्रों ने महाविद्यालय प्रशासन एवं तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य डॉ. इनामुर रहमान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में शैक्षणिक संस्थान में धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने, पक्षपातपूर्ण कार्यशैली अपनाने, सामाजिक समरसता को नुकसान पहुंचाने और अनुशासनहीनता पर नियंत्रण न रखने जैसे आरोप लगाए गए थे।

शिकायत के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने जांच समिति गठित की थी, जिसने 7 दिसंबर 2022 को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसके आधार पर डॉ. रहमान को 9 दिसंबर 2022 को निलंबित कर दिया गया तथा 30 जनवरी 2023 को उनके विरुद्ध विभागीय आरोप पत्र जारी किया गया।

मामले की विस्तृत विभागीय जांच क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा, उज्जैन संभाग द्वारा की गई। जांच पूर्ण होने के बाद 25 मार्च 2025 को प्रस्तुत प्रतिवेदन में यह स्पष्ट किया गया कि डॉ. इनामुर रहमान के विरुद्ध लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य, प्रमाण या विश्वसनीय गवाह प्रस्तुत नहीं किए जा सके। ऐसे में आरोप प्रमाणित नहीं माने गए।

जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि इसी मामले से जुड़े आपराधिक प्रकरण में दर्ज एफआईआर को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 14 मई 2024 को निरस्त किया जा चुका है, जिससे प्रकरण का आधार और कमजोर हो गया।

इन सभी तथ्यों के मद्देनज़र मध्यप्रदेश शासन, उच्च शिक्षा विभाग ने डॉ. इनामुर रहमान के विरुद्ध चल रही विभागीय जांच को समाप्त करने का निर्णय लिया है। साथ ही, उनके निलंबन काल 9 दिसंबर 2022 से 31 मई 2024 तक की अवधि को सेवा नियमों के तहत कर्तव्य अवधि मान्य करते हुए निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि डॉ. इनामुर रहमान 31 मई 2024 को शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। यह आदेश राज्यपाल के नाम से जारी किया गया है।

अब सवाल है – जिस छात्र नेता लक्की आदिवाल की शिकायत पर तत्कालीन प्राचार्य पर एफआईआर दर्ज और निलंबन की कार्रवाई हुई थी, क्या उस छात्र नेता पर कोई कार्यवाही होगी ?

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।