इतिहास की छुपी वीरांगनाएं रहीं चर्चा का केंद्र
इंदौर, 14 जुलाई 2025: श्री देवी अहिल्या शिशु विहार में विचार मंथन सत्र का आयोजन रविवार को किया गया। भारतीय नारी विमर्श अध्येता समूह, मालवा प्रांत द्वारा आयोजित सत्र की शुरुआत दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती की पूजा-अर्चना से हुई। क्षेत्र प्रचार प्रमुख कैलाश चन्द्र ने कहा, “वह जो अनंत है, वह या तो आसमान है या मेरी मां।” उन्होंने बताया कि नारी विमर्श केवल तात्कालिक घटनाओं पर आधारित न होकर वैदिक काल से वर्तमान तक नारी की स्थिति पर व्यापक चिंतन होना चाहिए।
ऋषिकाओं का योगदान और पाठ्यक्रम की उपेक्षा
प्रांत संयोजिका देवयानी ने गार्गी, मैत्रेयी, घोषा जैसी ऋषिकाओं के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि आज के पाठ्यक्रम में इन्हें अपेक्षित स्थान नहीं मिला, जबकि रजिया सुल्तान जैसी आक्रांताओं को प्रमुखता दी गई है।
धर्म और इतिहास में महिला नेतृत्व
प्रेरणा मनाना ने बौद्ध धर्म की महाप्रजापति गौतमी, जैन धर्म की राजकुमारी जयंती और मौर्य काल की प्रभावती गुप्त सहित विभिन्न कालखंडों में महिलाओं की प्रभावशाली भूमिका पर प्रकाश डाला।
वीरांगनाओं और समाज सुधारकों का संघर्ष
सत्र में रानी लक्ष्मीबाई, अवंतीबाई, रानी दुर्गावती, सावित्रीबाई फुले, मीरा बाई, पंडिता रमाबाई जैसे नामों के योगदान को याद करते हुए उनके समाज सुधार और नारी चेतना के जागरण पर चर्चा हुई।
स्वतंत्रता संग्राम में महिला नेतृत्व
सरोजिनी नायडू, दुर्गाबाई देशमुख और कस्तूरबा गांधी जैसी महिलाओं के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को रेखांकित किया गया।
वैज्ञानिक उपलब्धियों में महिलाओं की भूमिका
सावित्री महंत ने स्वतंत्रता के बाद असीमा चटर्जी, कमला सोहनी, ऋतु करिधाल, अनुराधा टीके, कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स जैसी महिला वैज्ञानिकों की उपलब्धियों और चंद्रयान-2 व मिशन मंगल में उनकी भागीदारी का उल्लेख किया।
आधुनिक चुनौतियों पर चिंता
वक्ताओं ने Live-in Relationship और जिहादी मानसिकता के चलते युवतियों के मनोवैज्ञानिक शोषण और समाज में अनुशासन के संकट पर चिंता व्यक्त की।
कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं की बड़ी उपस्थिति रही और विचार मंथन सत्र ने भारतीय समाज में महिलाओं की ऐतिहासिक, सामाजिक और वैज्ञानिक भूमिका पर नई दृष्टि प्रस्तुत की।
