इंदौर, 24 मार्च न्यूज़ओ2
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने अवमानना के एक मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए 2-2 माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश बीती 16 मार्च को पारित करते हुए सजा को 3 सप्ताह के लिए स्थगित रखा है।
मामला वर्ष 2023 में पारित रिट याचिका के आदेश के अनुपालन से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ताओं को वर्ष 2004 से 07 अप्रैल 2016 तक नियमितीकरण एवं परिणामी लाभ देने के निर्देश दिए गए थे। निर्धारित समयावधि में आदेश का पालन नहीं किए जाने पर अवमानना याचिकाएं दायर की गई थीं।
याचिकाओं में अशोक कुमार पाडेयार, रामस्वरूप पंवार, कैलाश हंस, मुकेश कंडारे, बापूलाल लोट, रामचंद्र लोट, संजय चनाल, प्रकाशचंद्र कालोसिया एवं जगदीश लोट पक्षकार रहे। प्रतिवादी पक्ष में प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग मोहम्मद सुलेमान सहित आयुक्त, संयुक्त आयुक्त, सीएमएचओ मंदसौर एवं अन्य अधिकारी शामिल थे।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि अधिकारियों द्वारा बार-बार समय लेने के बावजूद आदेश का पूर्ण पालन नहीं किया गया। केवल आंशिक अनुपालन प्रस्तुत किया गया, जिसमें नियमितीकरण आदेश जारी किया गया, लेकिन परिणामी लाभ नहीं दिए गए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध अपील लंबित होना, आदेश के पालन से छूट का आधार नहीं हो सकता।
प्रकरण में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रसन्ना आर. भटनागर (साथ में पी. भट्ट) ने पैरवी की, जबकि प्रतिवादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता भुवन देशमुख उपस्थित रहे।
मामले की 22 बार सुनवाई के बावजूद आदेश का पूर्ण पालन नहीं होने पर न्यायालय ने सभी संबंधित अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई तथा तीन सप्ताह की अवधि में अनुपालन का अंतिम अवसर दिया है।
