लंबी हिरासत और ट्रायल में देरी को आधार बनाया

इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी महिला को जमानत दे दी है। अदालत ने लंबी न्यायिक हिरासत, महिला होने और ट्रायल में समय लगने की संभावना को देखते हुए यह राहत प्रदान की।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर की एकल पीठ में हुई। आरोपी स्म्ति इति तिवारी की ओर से अधिवक्ता संजय कुमार शर्मा ने पैरवी की, जबकि राज्य की ओर से सुनीत कपूर (जीए) और आपत्ति पक्ष की ओर से योगेश कुमार गुप्ता उपस्थित रहे।

अधिवक्ता जिल शर्मा के अनुसार अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र में दर्ज अपराध क्रमांक 323/2025 में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत मामला दर्ज है। आरोपी 29 अगस्त 2025 से न्यायिक हिरासत में थी।

यह आरोपी की दूसरी जमानत याचिका थी। इससे पहले 3 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने सुसाइड नोट को आधार मानते हुए उसकी पहली जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता संजय कुमार शर्मा ने तर्क दिया कि आरोपी महिला है, लंबे समय से जेल में है और मामले के मुख्य गवाह, मृतक की पत्नी की गवाही भी हो चुकी है। ऐसे में अब साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका नहीं है।

वहीं राज्य और आपत्ति पक्ष के अधिवक्ता सुनीत कपूर और योगेश कुमार गुप्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि सुसाइड नोट और गवाहों के बयान आरोपी के खिलाफ हैं, इसलिए जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने पाया कि मामले में करीब 30 गवाह हैं, जिससे ट्रायल पूरा होने में पर्याप्त समय लग सकता है।

इसी आधार पर अदालत ने बिना मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी किए आरोपी को जमानत देने का आदेश दिया। कोर्ट ने 25 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक जमानतदार पर रिहाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही आरोपी को ट्रायल के दौरान नियमित रूप से न्यायालय में उपस्थित रहने और निर्धारित शर्तों का पालन करने को कहा गया है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आरोपी शर्तों का उल्लंघन करती है, तो उसकी जमानत निरस्त की जा सकती है।

उल्लेखनीय है कि उक्त महिला अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र में दर्ज शराब कारोबारी भूपेंद्र रघुवंशी सुसाइड केस में आत्महत्या के लिए उकसाने और ब्लैकमेलिंग के आरोपों में आरोपी है।