इंदौर: नई श्रम संहिताओं के विरोध में प्रदर्शन
केंद्र ने 4 नई श्रम संहिताएँ लागू कीं; इंदौर में मजदूर संगठनों ने संभागायुक्त कार्यालय पर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा
इंदौर, 26 नवंबर 2025: केंद्र सरकार द्वारा 21 नवंबर 2025 से लागू की गई चार नई श्रम संहिताओं के विरोध में आज इंदौर में विभिन्न मजदूर संगठनों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। सुबह से जुटे प्रदर्शनकारियों ने संभागायुक्त कार्यालय के बाहर नाराजगी जताई और महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन में शामिल मजदूर नेताओं और संगठनों ने कहा कि इन चारों श्रम संहिताओं के माध्यम से 29 पुराने श्रम कानूनों को 4 श्रम संहिता कोड में तब्दील कर दिया है, जिससे दशकों में हासिल श्रमिक सुरक्षा वापस ली जा रही है। मजदूरों का आरोप है कि नई संहिताएँ बड़े उद्योगपतियों के पक्ष में हैं और मालिकों को कर्मचारियों को “हायर-एंड-फायर” के जरिए निकालने का आसान रास्ता दे रही हैं।
स्थल पर मौजूद श्रमिकों के अधिकारों के लिए लगातार लड़ने वाले अधिवक्ता ओम प्रकाश खटके ने कहा, “ये चारों श्रम संहिताएँ श्रमिकों के अधिकारों के खिलाफ हैं। लेबर कोर्ट का स्वरूप बदलने से श्रमिकों की न्यायिक पहुँच प्रभावित होगी।”
केंद्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों में रुद्रपाल यादव ने बताया कि 29 कानूनों को चार संहिताओं में समेकित करने से न्यायालयों के अधिकार कम कर दिए गए हैं और सरकारी नीतियों से मजदूरों की सुनवाई का रास्ता सिकुड़ रहा है।
सीटू राज्य उपाध्यक्ष कैलाश लिम्बोदिया ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो किसान आंदोलन की तरह एक बड़ा श्रमिक आंदोलन किया जाएगा और मजदूर अनिश्चितकालीन हड़ताल की ओर बढ़ेंगे।
आशा कार्यकर्ताओं की प्रतिनिधि कविता सोलंकी ने कहा कि पहले से ही उनका मानदेय न्यूनतम है और वे लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं; अब भविष्य निधि, बीमा और सामाजिक सुरक्षा जैसे लाभों से भी वंचित किया जा रहा है।
प्रदर्शन में शामिल संगठन
- केन्द्रीय श्रम संगठनो का संयुक्त मोर्चा, इंदौर (म.प्र.)
- इंटक (INTUC)
- एटक (AITUC)
- चोट
- एचएमएस (HMS)
- एआईयूटीयूसी (AIUTUC)
- SITU
- बैंक व बीमा कर्मचारी यूनियन
- जी.एस.एन.एल. फेडरेशन
- कर्मचारीगों का साझा मंच
- अन्य स्थानीय व राज्यस्तरीय श्रमिक संगठन
संयुक्त ज्ञापन में प्रमुख मांगें:
- 4 नई श्रम संहिताएँ वापस ली जाएँ।
- समी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी दी जाए।
- मजदूरों, स्कीम वर्करों व ठेका श्रमिकों के लिए न्यूनतम मासिक वेतन रु. 26,000/- लागू किया जाए।
- सरकारी सार्वजनिक उद्यमों का निजीकरण बंद किया जाए।
- सभी को न्यूनतम पेंशन रु. 10,000/- मासिक दी जाए।
- उद्योगों में ठेका प्रथा एवं हायर-एंड-फायर नीति समाप्त की जाए।
- श्रमिकों व महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी दी जाए।
- बोनस, EPF व ESI की सीमा बढ़ाई जाए।
- EPF का पैसा शेयर बाजार में निवेश करना बंद किया जाए।
- श्रमिकों के अधिकारों पर हमले बंद किए जाएँ।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ, लेकिन हालाँकि नेताओं ने केंद्र सरकार की नीति के खिलाफ तीखी भाषा का प्रयोग किया। कई प्रदर्शनकारियों ने नारेबाज़ी करते हुए सरकार की नीतियों का विरोध किया।
