इंदौर, 6 दिसंबर 2025 । हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, इंदौर द्वारा आयोजित Justitia – 2025 ग्रैंड लॉ कॉन्क्लेव का भव्य आयोजन शनिवार 6 दिसंबर को खंडवा रोड स्थित तक्षशिला परिसर, डीएवीवी ऑडिटोरियम में हुआ। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट एवं मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्तियों ने “Art of court craft, morals end ethics of advocacy” विषय पर अधिवक्ताओं और ज्यूडिशियरी स्टाफ को महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम की शुरुआत हाई कोर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इनानी के स्वागत उद्बोधन से हुई। इसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक चितले ने उद्बोधन दिया। आयोजन में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी शिरकत की।

वकालत दलील का खेल नहीं, सत्य की इबादत है”: न्यायमूर्ति जितेंद्र माहेश्वरी

इंदौर में आयोजित JUSTITIA 2025 में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के न्यायमूर्ति जितेंद्र माहेश्वरी ने अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वकालत केवल दलीलों की कला नहीं, बल्कि सत्य और नैतिकता की इबादत है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता “Officer of the Court” होते हैं, और उनका पहला दायित्व न्याय व सत्य के प्रति होता है, न कि केवल क्लाइंट की हर कीमत पर जीत। न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी वकील का “मोरल” हर हाल में केवल अपने क्लाइंट को जीत दिलाने का हो, या वह तथ्यों को तोड़े-मरोड़े, तो वह गलत रास्ते पर है। उन्होंने कहा—“सत्य सर्वोपरि है। जो खुद को जलाकर दूसरों को रोशनी दे, वही सच्चा वकील है।”

उन्होंने विपक्ष के प्रति शिष्टता (Courtesy) को वकालत का अनिवार्य गुण बताते हुए कहा कि नेहरू भी कहते थे कि—
“जब तक मजबूत विपक्ष नहीं होगा, हम निखर नहीं पाएंगे।” उन्होंने कहा कि भाषा में तहज़ीब होनी चाहिए। “जब आप कोर्ट से बाहर निकलें तो विपक्षी पक्ष भी आपकी वकालत का कायल हो। न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने कहा कि वकील का काम निडर होना चाहिए— “मिसालें बहुत हैं अंधेरे में लड़ने की, लेकिन जो खुद उजाला बनकर दूसरों के लिए रोशनी करे, वही सही मायने में वकील है।” उन्होने आगे कहा कानून की किताबें वकील बनाती हैं, कोर्ट क्राफ्ट सफल वकील बनाते हैं। उन्होने कहा कि –

  • सबसे पहले जज को पढ़िए — उनका रुझान, प्रवृत्ति, सवाल
  • केस की ब्रीफ अत्यंत महत्वपूर्ण है
  • ड्राफ्टिंग मजबूत होनी चाहिए, क्योंकि वही केस की नींव है
  • प्रेज़ेंटेशन सटीक , संक्षिप्त और विनम्र हो
  • “दो घंटे बहस करने से कुछ नहीं होता, बात सारगर्भित होनी चाहिए।”

जस्टिस माहेश्वरी ने महान अधिवक्ता नाना पालकीवाला का उल्लेख करते हुए कहा—“जब वे बोलते थे तो लगता था कि वे बहस नहीं कर रहे, बल्कि जटिल पहेली को सहजता से सुलझा रहे हैं।” उनकी सफलता का राज था—“वे विपक्षी को नहीं हराते थे, बल्कि कोर्ट की मदद कर रहे होते थे।

“वकील विनम्र हो तो जज भी संवेदनशील होता है”:जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा ने अधिवक्ता विकास यादव को श्रद्धांजलि देते हुए अपने उद्बोधन की शुरुआत गहरी संवेदना के साथ की। उन्होंने कहा कि “यदि वकील विनम्र होता है, तो न्यायाधीश भी संवेदनशील होते हैं। वे पीड़ा को समझते हैं।” न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि निगेटिविटी बहुत तेज़ी से फैलती है, जबकि सकारात्मक प्रयासों की चर्चा कम होती है। उन्होंने वकीलों को याद दिलाया कि अधिवक्ता की नैतिक जिम्मेदारी (Moral Duty) अदालत के भीतर और बाहर—दोनों जगह समान रूप से बनी रहती है। उन्होंने कहा कि “आप कोर्ट के बाहर जो बोलते हैं, उसकी प्रतिध्वनि अंदर तक पहुंच जाती है। कई बार उससे एक कदम आगे—आपकी चिट्‌ठियाँ भी पहुंच जाती हैं। दुर्भाग्य यह है कि कई बार हमें हमारे बारे में ही बताया जाता है, लेकिन इससे कुछ बदलता नहीं है।”

न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि यदि किसी केस में दम है, तथ्य मज़बूत हैं और तर्क न्यायसंगत हैं, तो राहत अवश्य मिलेगी। उन्होंने कहा कि सफलता पाने शॉर्ट कट नहीं है। सफलता लिफ्ट से नहीं सीढ़ी चढ़कर मिलती है, इसके लिए अपने वरिष्ठ अधिकवताओं के साथ सीखने की जरूरत है। पेशे में धैर्य और विनम्रता जरूरी है।

एक अच्छा वकील दलील देता है, लेकिन ग्रेट लॉयर मनवा लेता है: न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला

मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला ने नए अधिवक्ताओं में एथीकेट्स की कमी पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कोर्ट में कैसे पेश होना है, डायस कैसे छोडना है , इसलिए उन्हें किसी एडवोकेट का ऑफिस जॉइन करना चाहिए। यूनिफ़ोर्म बहुत साफ होना चाहिए और स्मार्टली यूनिफ़ोर्म पहनना चाहिए। प्रेजेंटेबल दिखना चाहिए। उन्होने कहा सबमिशन छोटा होना चाहिए न कि विस्तृत । एक अच्छा वकील दलील देता है और ग्रेट लायर मनवा लेता है।

“हर फाइल में एक LIFE… वकील समाज के हीलर्स हैं”:जस्टिस आनंद पाठक

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट (ग्वालियर बेंच) के जस्टिस आनंद पाठक ने एडवोकेसी के 7 लैंपों के बारे में भी प्रकाश डाला। उन्होने ईमानदारी, साहस, निर्भीकता, मेहनत, wit, सत्यनिष्ठा जैसे अधिवक्ताओं के गुण बताए। उन्होने कहा अधिवक्ता समाज के हीलर्स होते हैं। हीलर का गुण है empathy यानि समनुभूति, किसी के कष्ट को उसी के अनुरूप महसूस करना आता है तो आप अच्छे प्रोफेशनल हैं। संवेदनशीलता हर FILE में एक LIFE है, यदि संवेदनशीलता के साथ कोई केस देख रहे हैं तो आप वाकलात के 7 लैंप का प्रयोग कर रहे हैं। उपरोक्त गुणों को पाने के लिए जस्टिस पाठक ने चार आयामी फिटनेस पर ज़ोर दिया। उन्होने कहा कि यह पेशा 10 से 14 घंटे मेहनत की मांग करता है जिसके लिए आपको फिजिकल फिटनेस जरूरी है। इसके बाद मेंटल फिटनेस में law books पढ़ने के अलावा जनरल रीडिंग की भी आदत होनी चाहिए। यदि मेंटल फिटनेस लेना है तो जितना ज्यादा आप पढ़ेंगे, उतनी आपकी learning बढ़ेगी। ट्रेवलिंग भी लर्निंग बढ़ाती है। फिर interaction । इसके बाद इमोशनल फिटनेस, निर्णय आपके पक्ष में आने- नहीं आने पर आपका वक्तव्य बदल जाता है। इस फील्ड में high- low चलता है, कई बार आपके पक्ष में फैसला आता है, कई बार नहीं आता है, इसके लिए इमोशनली फिट होना चाहिए। चौथी फिटनेस आध्यात्मिक फिटनेस है, आपको पता होना चाहिए कि हम यहाँ एक रोल प्ले कर रहे हैं, उतार चढ़ाव ऊपर वाले की मर्जी है। इससे हमें संतुष्टि का भाव रहेगा तभी हीलिङ्ग का भाव आ पाएगा। संघर्ष कटुता नहीं दे इसलिए इमोशनल और spiritual फिटनेस बनाए रखना जरूरी है।

“अधूरी तैयारी न्याय को कमजोर करती है“:जस्टिस विवेक रुसिया

मप्र हाई कोर्ट जबलपुर मुख्य पीठ के न्यायमूर्ति विवेक रुसिया ने कहा अधूरी तैयारी न केवल वकील को बल्कि न्याय को भी कमजोर करती है। इसलिए पूरी तैयारी के साथ कोर्ट में पेश होना चाहिए। वकालत केवल दलीलों का काम नहीं, क्रॉस examination लंबे न हो, पॉइंट टू पॉइंट हों। न्यायलय में आचरण की अधिवक्ता की असली पहचान बनता है। उन्होने SID का लाइफ सूत्र देते हुए कहा S- speak with clarity, I- interpretate with intigrity, D-display dignity. उन्होने आगे कहा कि जस्टिस केवल होना नहीं चाहिए, दिखना भी चाहिए। सत्यनिष्ठा वकालात की प्राण वायु है। क्लाइंट का विश्वास नहीं टूटना चाहिए । न्यायमूर्ति रुसिया ने कहा अच्छे अधिवक्ता clever नहीं sincere होते हैं। वे पूरी prepration से आते हैं। उनमें हयूमिलिटी, डिसिप्लिन होता है और वे argument with grace करते हैं। वकालत में केस हार जीत में LUCK भी बड़ी भूमिका निभाता है। इसलिए केस हारने पर खिन्न नहीं होना चाहिए।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।