हाई कोर्ट जांच समिति को सौंपे दस्तावेज

इंदौर, 25 मई। देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचान रखने वाले इंदौर में जलापूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज और नमामि गंगे परियोजनाओं में कथित बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं।

पूर्व पार्षद एवं सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप कौशल ने माननीय उच्च न्यायालय में लंबित प्रकरण WP क्रमांक 50628/2025 के तहत गठित विशेष जांच आयोग के समक्ष 34 पृष्ठों का विस्तृत अभ्यावेदन और दस्तावेज प्रस्तुत कर हजारों करोड़ रुपये के कथित घोटाले, फर्जी बिलिंग और दूषित जल आपूर्ति से उत्पन्न जनस्वास्थ्य संकट की जांच की मांग की है।

अभ्यावेदन में आरोप लगाया गया है कि इंदौर नगर निगम द्वारा नमामि गंगे, AMRUT योजना, स्मार्ट सिटी, सीवरेज नेटवर्क, ड्रेनेज लाइन, STP संचालन और जल वितरण योजनाओं पर भारी बजट खर्च किए जाने के बावजूद नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं कराया जा सका। शहर के कई हिस्सों में आज भी सीवर मिश्रित पानी, पाइपलाइन लीकेज, जलभराव और सीवर ओवरफ्लो की गंभीर स्थिति बनी हुई है।

दस्तावेजों में दावा किया गया है कि शहर में 35 से 50 वर्ष पुरानी जर्जर पाइपलाइनें अब भी उपयोग में हैं, जिनके कारण सीवर मिश्रित दूषित पानी नागरिकों के घरों तक पहुंच रहा है। इससे डायरिया, टाइफाइड, उल्टी-दस्त, त्वचा रोग और पेट संक्रमण जैसी बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है।

अभ्यावेदन में नगर निगम के जलप्रदाय एवं ड्रेनेज विभाग, संबंधित ठेकेदारों और कुछ जनप्रतिनिधियों पर मिलीभगत से भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का आरोप लगाया गया है। कहा गया है कि करोड़ों रुपये की परियोजनाएं कागजों में पूर्ण दिखाकर भुगतान कर दिए गए, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बदतर बने हुए हैं।

पूर्व पार्षद दिलीप कौशल ने वर्ष 2024 में सामने आए करीब 128 करोड़ रुपये के कथित फर्जी बिल प्रकरण का भी उल्लेख किया है। आरोप है कि ड्रेनेज विभाग में फर्जी फाइलें, माप पुस्तिकाएं और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर भुगतान किए गए। मामले में वित्तीय अनियमितताओं के उजागर होने की आशंका के बीच महत्वपूर्ण दस्तावेजों के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज कराए जाने को भी अभ्यावेदन में संदिग्ध बताया गया है।

RTI से प्राप्त दस्तावेजों के हवाले से दावा किया गया है कि वर्ष 2018 से 2022 के बीच केवल जलापूर्ति लाइनों के संधारण और रखरखाव पर लगभग 466 करोड़ रुपये खर्च किए गए, इसके बावजूद नागरिक दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। आरोप है कि नगर निगम बिल प्रतिलिपियां, भुगतान रिकॉर्ड और कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं करा रहा, जिससे वित्तीय अनियमितताओं की आशंका और गहरा गई है।

अभ्यावेदन में कहा गया है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद खान और सरस्वती नदियों में आज भी untreated sewage बह रहा है। नमामि गंगे और नदी पुनर्जीवन योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए गए हैं। STP प्लांट, इंटरसेप्टर लाइन और सीवरेज नेटवर्क संबंधी दावों को कागजी बताते हुए वास्तविक स्थिति को गंभीर बताया गया है।

दस्तावेजों में वर्ष 2023 के स्नेह नगर बावड़ी हादसे का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें 36 लोगों की मौत हुई थी। साथ ही दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच कथित रूप से दूषित नर्मदा जल आपूर्ति से 38 लोगों की मौत का मुद्दा भी उठाया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय द्वारा विशेष जांच समिति गठित किए जाने का उल्लेख किया गया है।

अभ्यावेदन में मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, CAG रिपोर्ट, ऑडिट रिपोर्ट, नागरिक शिकायतों और RTI दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाया गया है कि नगर निगम की जल गुणवत्ता परीक्षण व्यवस्था भी गंभीर रूप से प्रभावित है। दावा किया गया है कि नगर निगम की एकमात्र जल परीक्षण प्रयोगशाला वर्षों से बंद पड़ी है और पर्याप्त परीक्षण के बिना जलापूर्ति की जा रही है। कुछ नमूनों में Faecal Coliform, Nitrate और Iron जैसे प्रदूषक BIS मानकों से अधिक पाए जाने का भी उल्लेख किया गया है।

दिलीप कौशल ने कहा कि केवल विज्ञापनों और पुरस्कारों से शहर नंबर-1 नहीं बन सकता। जब नागरिकों को स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा और दूषित पानी से लोग बीमार हो रहे हैं, तब यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार का प्रश्न है।

उन्होंने जांच आयोग से जलापूर्ति, ड्रेनेज, सीवरेज और नमामि गंगे परियोजनाओं का विशेष ऑडिट, फर्जी बिलिंग की जांच, संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदारों पर FIR, गायब दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच, थर्ड पार्टी तकनीकी परीक्षण और दूषित पानी से हुई मौतों की न्यायिक जांच कराने की मांग की है।

प्रेषक के अनुसार यह लड़ाई केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ नहीं बल्कि इंदौर के नागरिकों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है।

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