पूर्व पार्षद दिलीप कौशल के नेतृत्व में छावनी चौराहे पर हजारों लोगों ने मतदाता-सूची में लापता नामों को सार्वजनिक करने, पंचनामा बनाने और वोट की सुरक्षा की मांग की
इंदौर, 8 दिसम्बर 2025। भारत निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनिरीक्षण (SIR) कार्यक्रम के तहत इंदौर जिले में हुए 100 प्रतिशत घर-घर सर्वे के बाद मतदाता-सूची में बड़े स्तर पर गड़बड़ियों के संकेत मिले हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी (कलेक्टर) द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार जिले की 9 विधानसभा सीटों पर करीब 5 लाख 58 हजार से अधिक मतदाता सर्वे के दौरान मौके पर नहीं मिले।
रिपोर्ट के मुताबिक ‘मौके पर नहीं मिलने वाले’ इन मतदाताओं में
- 41,625 मृतक,
- 2,68,303 उल्लेखित पते पर नहीं मिले,
- 2,03,834 शिफ्टेड,
- 19,154 रीपीटेड और
- 25,962 अन्य श्रेणी के मतदाता शामिल हैं।
4.17 लाख मतों के अंतर वाले नतीजों पर सवाल
पूर्व पार्षद दिलीप कौशल ने बताया कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में इंदौर जिले की 9 विधानसभा सीटों पर हार-जीत का कुल अंतर 4,17,717 वोट रहा था। इनमें—
देपालपुर में 13,698,
इंदौर-1 में 57,939,
इंदौर-2 में 1,07,047,
इंदौर-3 में 14,757,
इंदौर-4 में 69,837,
इंदौर-5 में 15,671,
महू में 34,392,
राऊ में 35,522 और
सांवेर में 68,854 वोटों का अंतर दर्ज हुआ था।
कौशल ने आरोप लगाया कि जब SIR के तहत इस साल मौके पर नहीं मिलने वाले मतदाताओं की संख्या 5.58 लाख से अधिक है, तो यह स्थिति खुद-ब-खुद मतदाता-सूची की विश्वसनीयता और वोट-चोरी की आशंका को गंभीर बना देती है।
उनका कहना है कि सर्वे के दौरान जो गणना-पत्रक (फॉर्म) भरे गए, उन्हें आपत्तियों/निवेदन के बाद भी वापस नहीं बुलाया गया और न ही मौके का पंचनामा तैयार किया गया। SIR की स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार सभी विधानसभा क्षेत्रों में 100 प्रतिशत सर्वे पूर्ण दिखाया जा चुका है, फिर भी जिला निर्वाचन कार्यालय ने मौके पर नहीं मिलने वाले मतदाताओं के नाम और उनका विवरण सार्वजनिक नहीं किया है।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना का आरोप
पूर्व पार्षद कौशल ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने 14 अगस्त 2025 को बिहार राज्य के संदर्भ में अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि मौके पर नहीं मिलने वाले मतदाताओं का विवरण सार्वजनिक किया जाए, ताकि मतदाता-सूची पारदर्शी रहे और फर्जी मतदान पर रोक लगे।
उनका आरोप है कि इंदौर में SIR सर्वे पूर्ण होने के बाद भी जिला निर्वाचन कार्यालय ने न तो ऐसे मतदाताओं के नाम सार्वजनिक किए, न ही पंचनामा तैयार कराया, जिससे वोट-चोरी और फर्जी मतदान की संभावनाएं और बढ़ गई हैं। कौशल का कहना है कि पिछले 30 दिनों से चल रहे SIR कार्यक्रम में जो मतदाता मौके पर नहीं मिले, वे अंतिम चरण में अचानक ‘मौजूद’ दिखाकर गड़बड़ी की आशंका पैदा करते हैं।
छावनी चौराहे पर हस्ताक्षर अभियान
न्हीं मांगों को लेकर आज छावनी चौराहे पर नागरिकों ने बड़े स्तर पर हस्ताक्षर अभियान चलाया।
पूर्व पार्षद दिलीप कौशल के नेतृत्व में हजारों लोगों ने हस्ताक्षर कर भारत निर्वाचन आयोग से मांग की कि—
- SIR सर्वे में मौके पर नहीं मिलने वाले सभी मतदाताओं के नाम और विवरण सार्वजनिक किए जाएं,
- ऐसे सभी मामलों में विधिवत पंचनामा बनाया जाए,
- और फर्जी वोटिंग रोकने के लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
कौशल ने बताया कि हस्ताक्षर अभियान के बाद तैयार ज्ञापन की प्रति भारत निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी और मौके पर नहीं मिलने वाले मतदाताओं के संबंध में विधिक कार्रवाई की औपचारिक मांग की जाएगी।
ये रहे प्रमुख सहभागी
हस्ताक्षर अभियान में मुख्य रूप से रवि गुरनानी, श्रीमती सोनिला मिम्ररोट, विनीत ठाकुर, कमल वर्मा, राम यादव, दिनेश सिलावट, शैलू सेन, सुभाष सिरसिया, बादशाह मिम्ररोट, सचिन सिलावट, सुनील डामोर, दिलीप बामनिया, देवेन्द्र चौहान, अरविंद चौहान, विनोद जगताप, मिथुन यादव, राजू सोनकर, मुकेश बाथम आदि उपस्थित रहे।
अभियान के दौरान नागरिकों ने नारे लगाए—
“फर्जी वोट रोकना हमारा अधिकार…
जिसको चुने, उसकी बने सरकार…”
