एडवोकेट डॉ. पंकज वाधवानी ने NCRB आंकड़ों के विश्लेषण के बाद केंद्र सरकार को भेजे सुझाव
इंदौर। हाईकोर्ट एडवोकेट एवं विधि विशेषज्ञ डॉ. पंकज वाधवानी ने नाबालिगों व युवाओं में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्तियों पर गहन कानूनी रिसर्च की है। इस शोध में उन्होंने वर्ष 2018 से 2022 तक के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों का विश्लेषण किया। रिपोर्ट में सामने आया है कि 18 वर्ष से कम आयु के आरोपियों की संख्या हर वर्ष तेजी से बढ़ रही है, जो समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
डॉ. वाधवानी के अनुसार, किशोर न्याय अधिनियम 2015 के बावजूद नाबालिगों द्वारा अपराध की प्रवृत्ति में तेज वृद्धि हो रही है। NCRB के अनुसार 2010–14 के दौरान नाबालिग अपराधों में 47% वृद्धि हुई थी और पिछले दशक में यह लगभग 60% तक पहुंच चुकी है। वर्ष 2022 में देशभर में बच्चों के विरुद्ध दर्ज अपराधों की संख्या 1.62 लाख तक पहुंच गई, जो 2021 की तुलना में 8.7% अधिक है।
विभिन्न आयु वर्गों का अपराध विश्लेषण:
🔹 नाबालिग (<18 वर्ष):
प्रवृत्ति में सबसे तेज वृद्धि इसी वर्ग में देखी गई। 2018 में अनुमानित 0.50 लाख आरोपी थे, जो 2022 में बढ़कर 1.00 लाख हो गए।
🔹 युवा (18–25 वर्ष):
अपराधियों का सबसे बड़ा प्रतिनिधित्व इसी वर्ग से आता है। बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों में सबसे अधिक पीड़िताएं इसी आयु वर्ग से हैं।
🔹 मध्यम आयु (26–40 वर्ष):
इस वर्ग में आर्थिक और हिंसक अपराधों की अधिकता देखी गई। शिक्षा, रोजगार और जीवन दबाव इस वर्ग में अपराध का कारण बने।
🔹 वयस्क (41–60 वर्ष):
आपराधिक संलिप्तता में कमी, लेकिन आर्थिक धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों की प्रवृत्ति पाई गई।
🔹 वरिष्ठ नागरिक (60+):
इस वर्ग की अपराध में भागीदारी न्यूनतम रही। हालांकि, इन्हें साइबर धोखाधड़ी और ठगी का शिकार अधिक बनाया जा रहा है।
आंकड़ों का सारांश (लाखों में):
| आयु वर्ग | 2018 | 2019 | 2020 | 2021 | 2022 |
|---|---|---|---|---|---|
| <18 वर्ष | 0.50 | 0.60 | 0.70 | 0.85 | 1.00 |
| 18–25 वर्ष | 2.00 | 2.20 | 2.30 | 2.40 | 2.50 |
| 26–40 वर्ष | 1.80 | 1.85 | 1.90 | 1.92 | 1.95 |
| 41–60 वर्ष | 1.00 | 1.02 | 1.05 | 1.07 | 1.10 |
| 60+ वर्ष | 0.20 | 0.22 | 0.23 | 0.24 | 0.25 |
केंद्र सरकार को भेजे सुझाव:
एडवोकेट डॉ. पंकज वाधवानी ने इस शोध के आधार पर केंद्र सरकार को निम्नलिखित सुझाव भेजे हैं:
- शिक्षा और रोजगार का असंतुलन युवाओं को अपराध की ओर धकेल रहा है। इस दिशा में प्रभावी कदम आवश्यक हैं।
- टूटते परिवार, सामाजिक समर्थन की कमी और मानसिक तनाव युवा अपराध के मूल कारण हैं।
- डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल ने साइबर अपराधों को जन्म दिया है।
- अनुसूचित जाति/जनजाति के युवाओं को विशेष संरक्षण और संसाधनों की आवश्यकता है।
- वृद्ध नागरिकों के खिलाफ बढ़ते साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
संपर्क:
डॉ. पंकज वाधवानी
हाई कोर्ट एडवोकेट
मोबाइल: 98273 96423
