इंदौर, 15 जनवरी 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 27 फरवरी 2015 को लोकसभा में दिए गए उस बयान—कि मनरेगा को कांग्रेस की विफलताओं का “जीवित स्मारक” बनाकर रखा जाएगा, लेकिन इसे खत्म नहीं किया जाएगा—के संदर्भ में नई योजना और संशोधन को लेकर उठे सवालों पर सरकार की ओर से सीधे जवाब नहीं मिले।

पत्रकार वार्ता में सवाल किया गया कि

“योजना को जीवित रखने और मजदूर को जीवित रखने—इन दोनों में सरकार किसे प्राथमिकता दे रही है?” साथ ही यह भी पूछा गया कि जब मनरेगा शुरू होने के बाद से अब तक मजदूरों को वादे के अनुसार 100 दिन के बजाय औसतन 50 दिन भी काम नहीं मिल पाया, तो 125 दिन रोजगार का नया दावा कैसे पूरा किया जाएगा। इसके अलावा नए संशोधन से राज्य सरकारों पर पड़ने वाले लगभग 40 प्रतिशत अतिरिक्त वित्तीय भार को लेकर भी जवाब मांगा गया।

जवाब में क्या कहा मंत्री ने

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सवालों के सीधे उत्तर देने के बजाय योजना के उद्देश्य और सरकार की मंशा पर बात की। उन्होंने कहा कि—

“ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी असेट्स नहीं बन पाए। अब राज्य सरकारों की नई प्लानिंग हुई है और उसी प्लानिंग को इस योजना से जोड़ा गया है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी विकास हो सके।” उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा के तहत पहले वृक्षारोपण जैसे काम होते थे, लेकिन बीच-बीच में आए आदेशों के कारण कई गतिविधियां बंद करनी पड़ीं। नई व्यवस्था में राज्य सरकारों को यह स्वतंत्रता दी गई है कि वे मजदूरों से किस तरह का काम लें, यही इस बिल की बड़ी विशेषता है।

मुख्य सवाल अनुत्तरित

हालांकि मंत्री के जवाब में, 100 दिन बनाम 125 दिन रोजगार की व्यवहारिकता, मजदूरी भुगतान, राज्य सरकारों पर बढ़ते वित्तीय बोझ, और मजदूरों को वास्तविक लाभ जैसे सवालों पर कोई स्पष्ट आंकड़ा, समयसीमा या ठोस रोडमैप सामने नहीं आया। विजयवर्गीय ने यह जरूर कहा कि बिल पारित हो चुका है और इसके नियम अभी बन रहे हैं, तथा नियम बनने के बाद और सुधार किए जाएंगे।

राजनीति बनाम ज़मीनी हकीकत

कांग्रेस द्वारा देशभर में किए जा रहे आंदोलन पर पलटवार करते हुए मंत्री ने कहा कि इसी कारण सरकार इस बिल की प्रमुख विशेषताओं को सामने रख रही है। लेकिन पत्रकारों द्वारा उठाए गए सवालों का निष्कर्ष यही रहा कि सरकार ने नीति और नीयत पर बात की, जबकि मजदूर की रोजमर्रा की हकीकत पर जवाब अधूरे रहे। आपको बता दें, कि आज गुरुवार 15 जनवरी को जावरा कंपाउंड स्थित भारतीय जनता पार्टी के कारयालाय में नगरीय प्रशासन मंत्री और इंदौर -1 से स्थानीय विधायक कैलाश विजयवर्गीय ने जीरामजी योजना के प्रसार- प्रसार के बारे में एक प्रेस वार्ता आयोजित की थी, जिसमें उन्होने उक्त बात कही।

मनरेगा को “जीवित” रखने के दावे और नई योजना के बीच यह सवाल अब भी कायम है कि क्या बदलाव काग़ज़ों तक सीमित रहेगा या मजदूर को सच में ज्यादा काम और स्थायी रोजगार मिलेगा।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।