बालाघाट पुलिस की ग़लत जांच, अब मिलेगा 1 लाख मुआवज़ा

जबलपुर / इंदौर : हाईकोर्ट ने 39 वर्षीय गिरधारी सोनवाने को तीन साल छह महीने बाद जेल से बरी करने के आदेश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि बालाघाट पुलिस की जांच ग़लत और दुर्भावनापूर्ण थी।

सोनवाने पर दो बच्चियों के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या का आरोप था। निचली अदालत ने 2024 में उसे फाँसी की सज़ा सुनाई थी। लेकिन डिवीजन बेंच—जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह ने पाया कि गवाहों के बयान अविश्वसनीय हैं।

एक गवाह ने पहले आरोपी को “गोल्डन मोटरसाइकिल” पर देखा बताया, बाद में वही मोटरसाइकिल “सिल्वर” हो गई। अदालत ने माना कि “लास्ट सीन थ्योरी” टिक नहीं पाई।

हाईकोर्ट ने सोनवाने को बरी करते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया कि उसे एक लाख रुपये मुआवज़ा दिया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस अधीक्षक चाहें तो यह रकम उस विवेचना अधिकारी से वसूल सकते हैं जिसने जांच बिगाड़ी।

अदालत का स्पष्ट संदेश—कानून का मक़सद सिर्फ़ सज़ा देना नहीं, बल्कि निर्दोष की ज़िंदगी बचाना भी है।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।