नए वकील से मात्र 675 रुपए, लेकिन अन्य राज्यों से आने वाले से 15 हज़ार—हाईकोर्ट ने कहा यह मनमानी वसूली अवैध

जबलपुर/ इंदौर ।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्टेट बार काउंसिल द्वारा वकीलों से मनमानी शुल्क वसूले जाने पर कड़ी नाराज़गी जताई है। नए वकील से रजिस्ट्रेशन शुल्क 675 रुपए लिया जाता है, जबकि अन्य राज्यों से ट्रांसफर होकर आने वाले वकीलों से 15,000 रुपए मांगे जा रहे थे।

चीफ़ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने कहा कि केवल नाम दर्ज करने के लिए इतनी भारी राशि लेना अनुचित है। याचिका अधिवक्ता रोहित पाठक ने दायर की थी। अदालत ने निर्देश दिया कि बिना कोई शुल्क वसूले उनका नाम एनरोलमेंट रजिस्टर में दर्ज किया जाए।

कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया और स्टेट बार काउंसिल, दोनों को नोटिस जारी किए हैं। अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि बार काउंसिल पेशेवर संगठन हैं, इन्हें राजस्व संग्रह केंद्र की तरह कार्य नहीं करना चाहिए।

By Neha Jain

नेहा जैन मध्यप्रदेश की जानी-मानी पत्रकार है। समाचार एजेंसी यूएनआई, हिंदुस्तान टाइम्स में लंबे समय सेवाएं दी है। सुश्री जैन इंदौर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार की संपादक रही है। इनकी कोविड-19 महामारी के दौरान की गई रिपोर्ट को देश और दुनिया ने सराहा। अपनी बेबाकी और तीखे सवालों के लिए वे विख्यात है।